डेंगू से कैसे बचें। सफाई ही नहीं, इम्युनिटी पर भी दें ध्यान

डेंगू से कैसे बचें

हमारे घरों के आस-पास पानी की गंदी नालियाँ मच्छरों को जन्म देने का मुख्य काम करती है। मच्छरों से होने वाली वायरल बिमारी डेंगू ( Dengue ) के मामले पिछले कुछ सालों में बढ़ते ही जा रहे है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ ( WHO ) की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 390 मिलियन मामले डेंगू ( Dengue ) के सामने आए है। भारत में भी 2014-15 की तुलना में डेंगू ( Dengue ) के मामले दोगुने हो गए है। हमारे द्वारा बरती गई जरा सी लापरवाही और साफ़-सफाई के अभाव से हम मच्छर जनित रोग डेंगू ( Dengue ) की चपेट में आसानी से आ सकते है।

 हालांकि डेंगू ( Dengue ) की चपेट में कोई भी आ सकता है लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण यह आशंका बढ़ जाती है। अगस्त से अक्टूबर के माह तक डेंगू ( Dengue ) के मच्छर ज्यादा सक्रिय रहते है। और तापमान गिरावट होने पर प्रजनन नहीं करते है जहाँ लंबे समय तक पानी जमा हो वहां ये प्रजनन करते है। आश्चर्य की बात तो यह है कि पानी सूखने के बाद भी 12 महीनों तक इनके अंडे जीवित रह सकते है। 

 #  डेंगू के लक्षण क्या है :-

डेंगू ( Dengue ) के लक्षण सामने आने में ज्यादा दिन नहीं लगते लगभग 3 से 15 दिनों में इसके लक्षण सामने आ जाते है। पीड़ित को बुखार होने लगता है। बुखार में प्लेटलैट्स की संख्या कम हो जाती है। हालांकि डेंगू ( Dengue ) के हर मरीज को प्लेटलैट्स चढाने की आवश्यकता नहीं होती है। डेंगू ( Dengue ) में कई बार चौथे-पांचवे दिन बुखार थोड़ा धीमा पड़ जाता है। लेकिन कई बार इस दौरान प्लेटलैट्स गिरने लगती है। 20 हज़ार या इससे निचे पहुँच जाने पर पीड़ित को प्लेटलैट्स चढाने की जरूरत होती है। इसके अलावा :-
  1. बुखार। 
  2. तेज़ सिरदर्द। 
  3. जी मिचलाना। 
  4. मसल्स और जोड़ों में दर्द। 
  5. उलटी आना। 
  6. कमज़ोरी होना। 
  7. शरीर पर लाल-लाल दाने हो जाना। 
  8. चक्कर आना जैसे लक्षण दिखने लगते है। 

 #  किसके काटने से होता है डेंगू :-

दरअसल डेंगू ( Dengue ) एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के सम्पर्क में आने से नहीं फैलता है। मादा एडीज एजिप्टी मच्छर इस रोग को फैलाती है। संक्रमित ( पीड़ित ) व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक डेंगू ( Dengue ) के वायरस पहुंचाने का काम मादा एडीज एजिप्टी ही करती है। डेंगू ( Dengue ) वायरस के चार तरह के वायरस में से किसी एक तरह के वायरस से डेंगू ( Dengue ) का बुखार होता है। रात की बजाय यह मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय होते है। और ठंडी जगहों पर रहना पसंद करते है।

जब कोई रोगी डेंगू ( Dengue ) के बुखार से ठीक होता है तो उसे संबंधित एक प्रकार के डेंगू ( Dengue ) वायरस से लंबे समय के लिए प्रतिरोधकता मिल जाती है। लेकिन बाकी के बचे तीन वायरसों के संक्रमण से दूसरी बार भी डेंगू ( Dengue ) का बुखार हो सकता है।

 #  ऐसे करें डेंगू से अपना बचाव :-

  1. अपने घर में या अपने घर के आसपास पानी जमा न होने दें। ठहरे हुए पानी में मच्छर ज्यादा मात्रा में पनपते है। 
  2. छत या आसपास पड़े टूटे हुए मटके, खाली डिब्बों, बेकार टायर ट्यूब आदि में बारिश का पानी जमा न होने दें। 
  3. घर से बाहर निकलते समय ख़ास तौर पर पार्क में जाने के लिए ऐसे कपड़े पहने जिनसे आपके हाथ और पाँव अच्छी तरह से ढके हुए हों। 
  4. लेमन यूकेलिप्टस ऑयल, लेवेंडर, नीम का तेल, दालचीनी आदि का इस्तेमाल कर मच्छरों से आप बच सकते है। 
  5. अपने कूलर के पानी को रोजाना बदलें। अगर कूलर की जरूरत ना हो तो उसमें से पानी निकाल कर उसे अच्छी तरह से सूखा कर रखें। 
  6. फीवरफ्यू, केटनिप, सिटोनेला और लेवेंडर को रखने से भी आप मच्छरों से बच सकते है। लहसुन, पुदीना और तुलसी भी आपसे मच्छरों को दूर रखेंगें। 

 #  डेंगू से बचने के लिए अपनाएं कुछ घरेलू नुस्खे :-


 #  डेंगू में है पपीता फायदेमंद :-

पपीते की पत्तियां प्लेटलैट्स बढ़ाने में मदद करती है। शरीर में दर्द, कंपकंपी, कमज़ोरी और जी मिचलाना आदि लक्षणों से राहत मिलती है। पत्तियों को पीसकर जूस बनाकर सेवन किया जा सकता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स को भी दूर करने में सहायता करता है। 

 #  तुलसी और काली मिर्च से करें डेंगू का उपचार :- 

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए तुलसी की पत्तियों को पानी में उबाल कर दो ग्राम काली मिर्च का पाउडर मिलाकर सेवन करना चाहिए। यह एंटीबैक्टेरियल तत्व की तरह काम करता है।   

 #  हल्दी से डेंगू का उपचार :-

मेटाबॉलिज़्म और हीलिंग की प्रक्रिया को बढ़ाने में हल्दी कारगर होती है। दूध के साथ हल्दी का सेवन कीजिए फायदा जरूर होगा। 

 #  डेंगू में है संतरा लाभदायक :- 

एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन सी से भरपूर संतरा इम्युनिटी बढ़ाता है। इससे एंटीबॉडीज बढ़ते है और टॉक्सिन भी आसानी से यूरिन के जरिए बाहर निकल जाते है। इसी तरह स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी में भी एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो प्लेटलैट्स को बढ़ाता है। यह डेंगू के दूसरे लक्षणों और वायरस को हटाने में मददगार होता है। 

 #  जौं से करें डेंगू का उपचार :-

जौं रक्त में प्लेटलैट्स बढ़ाने का कार्य करता है। जौ को आप, जौ की चाय या अन्य किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, ब्रोकली, गोभी, टमाटर आदि लाभकारी होते है। मेथी की पत्तियां बुखार और दर्द कम करने के साथ ही आरामदायक नींद दिलाने में भी कारगर है। 

 #  डेंगू में गिलोय अपनाएं :-

आयुर्वेदिक विद्या में गिलोय काफी लाभकारी माना जाता है। यह मेटाबॉलिक रेट को मेन्टेन रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और शरीर को संक्रमणों से बचाने में मदद करता है। गिलोय को उबाल कर हर्बल ड्रिंक भी बना सकते है।

 #  Note :- 


 #  डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में डेंगू के 390 मिलियन मामले है। भारत में भी 2014-15 की तुलना में डेंगू के मामले दोगुने हो गए है।

 #  4 तरह के वायरस में से किसी एक तरह के वायरस से डेंगू का बुखार होता है।   

 #  Conclusion:-

दरअसल मच्छर हमारी ही लापरवाही की वजह से पनपते है क्योंकि हम पानी को अच्छे से नहीं काम में लेते। हम पानी को व्यर्थ ज्यादा बहाते है   जिसकी वजह से उस पानी में मच्छर पैदा हो जाते है। और फिर मच्छर मलेरिया और डेंगू जैसी घातक बीमारियों का कारण बनते है। हमारे घरों के आस-पास नालियां की सफाई ना होने की वजह से भी मच्छर पैदा होते है। हर एक-दो माह में अपने घर की सफाई जरूर करते रहें।  अपने घर में व्यर्थ कूड़ा-कचरा जमा न होने दें। कूड़ा-कचरा या कबाड़ भी मच्छरों के पनपने का एक कारण है। अंत: हम आपसे विनम्र निवेदन करते है कि अगर आपको मलेरिया और डेंगू जैसी घातक बीमारियों से बचना है तो अपने घर में और घर के आसपास पानी और कचरा बिलकुल जमा न होने दें।


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 #  Extra Tips :-


 #  फल खाने से होता है डायबिटीज का रिस्क कम :-

चीन के सेहत विषेशज्ञों ने कम से कम पांच लाख वयस्कों पर 7 साल तक अध्ययन करने के बाद पाया कि जो लोग रोज ताजा फल खाते है। उनमें डायबिटीज होने का रिस्क दूसरे लोगों की तुलना में 12 फीसदी कम होता है। जबकि पहले से ही टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज के शिकार हो चुके जो लोग हफ्ते में 3-4 बात ताजा फल खातें है, उनमें हार्ट डिजीज या न्यूरोपैथी जैसी जटिल बिमारी होने का जोखिम 13 से 28 फीसदी तक घट जाता है। 

 #  सफेद वाइन हो सकती है कैंसर का कारण :-


अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के अनुसार सफेद वाइन स्किन कैंसर के एक प्रकार यानी इंवेसिव मेलानोमा के लिए जिम्मेदार है। इसमें एसेटालटिहाइड केमिकल अन्य अल्कोहल प्रोडक्ट्स जैसे बीयर या रेड वाइन की तुलना में ज्यादा होता है। कैंसर एपिडेमियोलॉजी, बायोमार्कर्स एंड प्रिवेंशन जर्नल में प्रकाशित इस शोध में धूप के ज्यादा व वाइट वाइन के बीच संबंध होने से त्वचा के कैंसर का खतरा बढ़ता है। 

Last Words :-

दोस्तों डेंगू से कैसे बचें। सफाई ही नहीं, इम्युनिटी पर भी दें ध्यान का ये लेख 
आपको कैसा लगा अपने विचार हमसे अवश्य शेयर करें। 
हम मिलेंगें आपसे फिर, एक नए और फ्रेश आर्टिकल के साथ। 
तब तक के लिए खुश रहें और अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें।  
धन्यवाद। 

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