शरीर के अंदर की सफाई कैसे रखें How to Keep Body Clean.

शरीर के अंदर की सफाई कैसे रखें How to Keep Body Clean

How to Keep Body Clean
शरीर को अंदर से साफ़ रखने के लिए अगर आप जरूरी चीजें नहीं अपना रहे है, तो आप 100% बीमारियों को निमंत्रण दे रहें। एक निश्चित समय के अंतराल में शरीर की सफाई करते रहना बेहद आवश्यक है। सुस्ती, कमज़ोरी, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, नींद की कमी, उल्टी, तनाव जैसी समस्याएं बिना कारण बढ़ती जा रही है तो यह शरीर के अंदर जमा हो रहे विषैले पदार्थों का सकेंत हो सकता है। दरअसल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बाहर से ही नहीं अंदर से भी साफ़ रखना जरूरी है। क्योंकि हमारे खानपान, तनाव आदि कई कारणों से हमारे शरीर में लगातार गंदगी जमा होती जा रही है जिससे हमें बचने की आवश्यकता है। समय रहते अगर इसकी देखभाल न की जाए तो यह बीमारियों का घर बन जाता है। शरीर के अंदर की सफाई को डिटॉक्सिफिकैशन कहते है। डिटॉक्स का मतलब होता है हमारे शरीर के अंदर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना। चलिए जान लेते है शरीर के अंदर की सफाई कैसे रखें इस आर्टिकल के माध्यम से।

 #  आपका खानपान हो संतुलित :-

अच्छे और शुद्ध खानपान के जरिए शरीर में जमा होने वाले विषैले पदार्थों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फ़ास्ट फ़ूड और प्रॉसेस्ड फ़ूड की बजाय फल और हरी सब्ज़ियों का सेवन करें। क्योंकि इनमें लिवर एन्जाइम सक्रिय करने की क्षमता होती है। इससे विषैले पदार्थ शरीर से आसानी से निकल जाते है। फल, सब्ज़ियां, अनाज आदि उगाने में इन दिनों जिस तरह कीटनाशक व अन्य विषैले रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है, इनके साइड इफेक्ट से बचने के लिए आर्गेनिक फ़ूड का सेवन करना चाहिए। ब्रोकली, लहसुन, अंकुरित चना, मूंग और हरी सब्ज़ियां खानी चाहिए। ओट्स फाइबर युक्त होने के साथ ही डाइयुरेटिक की तरह काम करता है और किडनी और कोलोन दोनों से ही यह विषैले तत्व हटाता है। 

 #  ऐसे होती है शरीर की सफाई :-

लिवर, त्वचा, फेफड़े, बड़ी आंत और किडनी मिल कर शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते है। त्वचा से निकलने वाले पसीने से भी काफी मात्रा में टॉक्सिन यानी विषैले पदार्थ बाहर निकलते है। यही वजह है कि डिटॉक्सिफिकेशन के लिए एक्सरसाइज जरूरी है। लिवर व्यर्थ या विषैले पदार्थों को छानने का काम करता है। इसी तरह फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकालने का काम करते है। बड़ी आंत पानी व अन्य पोषक तत्वों को अवशोषित करती है। साथ ही व्यर्थ पदार्थ को मल में परिवर्तित करती है। इसी तरह किडनी रक्त को साफ़ करने और विषैले या व्यर्थ पदार्थों को मूत्र के जरिए बाहर निकालने का काम करती है यह सभी अंग सही ढ़ंग से काम करें इसके लिए जरूरी है कि हम अपने लाइफस्टाइल को बेहतर तरीके से मेन्टेन रखें।

 #  शरीर की सफाई के लिए पानी है बेहद जरूरी :-

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शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में पानी सबसे अच्छा विकल्प है। हर मनुष्य को रोजाना 8 से 10 ग्लास पानी अवश्य पीना चाहिए। इससे फायदा यह होता है कि विषैले पदार्थ हमारे शरीर से आसानी से मूत्र के जरिए बाहर निकल जाते है। और डिहाइड्रेशन भी नहीं होता। पानी की जगह चाय, कॉफ़ी या कोई सॉफ्ट ड्रिंक नहीं ले सकते है। पानी के अलावा ताजा फलों का जूस, ग्रीन टी आदि लिया जा सकता है। शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए पानी से बेहतर कुछ भी नहीं है। शरीर की हर छोटी बड़ी प्रक्रिया में पानी की अहम भूमिका होती है कोशिकाओं की मरम्मत से लेकर अंगों को टॉक्सिन फ्री करने तक के कामों में पानी की जरूरत होती है। इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिसीन के मुताबिक एक दिन में पुरुषों को 3 लीटर पानी और महिलाओं को 2.2 लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए।   

 #  शरीर के अंदर की सफाई करें नींबू पानी से :-


दिन की बेहतर शुरुआत करने के लिए सुबह उठते ही सबसे पहले एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू का रस मिला कर पिएं। विटामिन सी के साथ ही इसके जरिए शरीर को पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नेशियम के तौर पर हाइड्रेटिंग इलेक्ट्रोलाइट मिलता है। रात भर से हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इससे हाइड्रेशन जरूरी होता है। इसके साथ-साथ नींबू पानी लिवर के एंजाइम को और सक्रिय करते है। जो पाचन तंत्र सही रखने के साथ ही विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह एंटीऑक्सीडेंट भी होता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। 

 #  डिटॉक्सीफिकेशन है जरूरी :-

विषैले तत्वों में भारी धातु, रसायन, प्रदूषण के कारक, आर्टिफिशियल फ़ूड, कीटनाशक आदि शामिल होते है। यह तत्व हमारे खाने, पिने, साँस लेने और बदली हुई लाइफस्टाइल की वजह से आसानी से शरीर में पहुंच जाते है। धीरे-धीरे इनके प्रभाव से शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी परेशानियां बढ़ने लगती है। इन हानिकारक तत्वों से पूरी तरह शरीर को बचा पाना तो मुश्किल है लेकिन समय पर डिटॉक्सीफिकेशन के द्वारा इन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सकता है। 

 #  एक्सरसाइज भी है जरूरी :- 

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एक्सरसाइज करने से शरीर से पसीना निकलता है जिसमें आर्सेनिक, कैडमियम, पारा और मर्करी जैसे धातु बाहर निकलते है। इसी तरह मेडिटेशन तनाव कम कर दिमाग को साफ़ यानी शांत रखने का काम करता है। अन्य रसायनों की तरह तनाव भी एक विषैले पदार्थ के जैसा रसायन ही है। जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। 

 #  शरीर को शुद्ध रखें :-

संतरे और अदरक के स्लाइसेस को पानी में डालें। संतरा हमारे शरीर में रक्त संचार का इजाफा करता है। खीरा, स्ट्रॉबेरी, और अंगूर को पानी में डालकर एक स्वादिष्ट पेय बनाएं। खीरे का काम है आपके शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखना और टॉक्सिन्स को बाहर निकालना। स्ट्रॉबेरी में एंटी इंफ्लेमेट्री तत्व होते है। और अंगूर में शामिल तत्व कैंसर से हमारी बॉडी की रक्षा करते है और शरीर को साफ़ रखते है। रूहुबर्ब एक प्रकार का फल है जिसमें शामिल तत्व विटामिन के ब्लड क्लॉटिंग से भी बचाते है सेब के फायदों से तो आप सभी भली भाँती वाकिफ है पानी में इसकी स्लाइसेस डालकर पिने से हड्डियों और उत्तकों को शक्ति मिलती है।

 #  शुद्ध वातावरण में सांस लें :-    

आजकल के वातावरण में सांस लेना तो यूँ लगता है जैसे हम खुद बीमारियों को न्योता दे रहें है। वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव से खुद को बचा कर रखना आज की स्थिति में सम्भव नहीं है। ऐसे में एयर प्यूरिफिकेशन उपरकर्णों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा थोड़ी-थोड़ी देर से गहरी सांसें लेनी चाहिए। इससे हमारे शरीर के अंदर तक ऑक्सीजन पहुँचती है और ऊर्जा का संचार होता है।

 #  Conclusion:-

हमारे जीवन में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है हमारा शरीर, इसी की वजह से हम सर्वाइव कर पाते है। इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है। हमारी बॉडी को कुछ हो जाए तो हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाएंगें। और हम है कि इसकी बिलकुल भी देखभाल नहीं करते है। अंत: हमारा आपसे यही विनम्र निवेदन है कि अगर आज हम अपने शरीर की देखभाल करेंगें तब जाकर ये कल को हमारी केयर कर पाएगा। इस ( शरीर के अंदर की सफाई कैसे रखें ) लेख के जरिए हम आप सभी तक यही मैसेज पहुंचाना चाहते थे।

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 #  Extra Tips :-


 #  प्लास्टिक की बोतल के बजाए स्टील की बोतल का इस्तेमाल कीजिए :-

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गर्मीं के मौसम में ठंडे पानी की इच्छा ( तड़प ) फ्रीज में रखी प्लास्टिक की बोतल भले ही तुरंत पूरी कर देती हो लेकिन बोतल में रखा पानी बीमारियां भी साथ में परोसता है। अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा एक शोध में यह पाया गया है कि प्लास्टिक की बोतलों में रखा पानी न केवल कई घातक बीमारियों का कारण बनता है। बल्कि यह महिलाओं में मोटापा भी बढ़ाता है। प्लास्टिक की बोतल से कहीं ज्यादा स्टील या तांबे के बर्तन में पानी रखना बेहद फायदेमंद है। 

 #  रोजाना एक कप चाय से घटता है डिमेंशिया का खतरा :-

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चाय पीने वालों के लिए यह अच्छी खबर है। रोजाना एक कप चाय पिने से डिमेंशिया का खतरा 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। जर्नल ऑफ़ हेल्थ एंड न्यूट्रिशन में प्रकाशित शोध के अनुसार ग्रीन-टी और ब्लैक-टी में ऐसे ख़ास तत्व पाए जाते है। जो ब्रेन में सेल्स को डैमेज होने से रोकते है। याद्दाश्त से जुड़ा यह शोध 55 वर्ष के लोगों पर लगभग 12 साल तक चला।  इसके साथ-साथ चाय न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को भी रोकने में मदद करती है। 

 #   Last Words :-

दोस्तों शरीर के अंदर की सफाई कैसे रखें इस लेख के बारे में 
आपके क्या विचार हमारे साथ कमेंट बॉक्स में 
अवश्य साझे करें। 
हम मिलेंगें आपसे एक बार फिर फ्रेश और ताजा आर्टिकल के साथ 
तब तक के लिए अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें  
धन्यवाद।

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