हेल्थ को टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभाव से कैसे बचाएं। Technology Attack se kaise bache

हेल्थ को टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभाव से कैसे बचाएं  

 Technology Attack se kaise bache
आज के दौर में टेक्नोलॉजी हमारे जीवन का  एक बेहद महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। जैसे-जैसे मनुष्य विकसित हो रहा है उसी के साथ-साथ टेक्नोलॉजी का भी विकास हो रहा है। कुछ समय पहले इसका ज्यादा प्रचलन नहीं था लेकिन समय के साथ-साथ इसकी जरूरत बढ़ने लगी। और आज ऐसा समय आ चुका है कि मानो टेक्नोलॉजी के बगैर हम एक पल भी नहीं गुज़ार सकते। अपनी प्रगति और विकास के लिए हम टेक्नोलॉजी का जितना ज्यादा इस्तेमाल कर रहें है। उतना ही इसका विपरीत असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। देश-विदेश से कई ऐसे शोधकर्ताओं ने ऐसी कई मानसिक बीमारियों का पता लगाया है। जिनकी वजह इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल करना माना गया है। तो चलिए जान लें कि किन-किन कारणों से होता है हमारे स्वास्थ्य पर टेक्नोलॉजी का अटैक :-


 #  नोमोफोबिया ( बार-बार मोबाइल चेक करना ):-

इस बिमारी का सबसे ज्यादा असर आज के Youth पर हो रहा है। बार-बार मोबाइल फ़ोन चेक करना, किसी को फ़ोन न मिलने पर बेचैनी महसूस होना और मोबाइल के बगैर एक पल भी नहीं रह पाना आदि जैसे लक्षण नोमोफोबिया की ओर संकेत करते है। इसी तरह फोमो यानी फियर ऑफ़ मिसिंग आउट भी एक बिमारी है जिसमें व्यक्ति को मोबाइल पास न होने पर दुनिया में चल रही गतिविधियों के बारे में जानकारी न होने का डर सताने लगता है। 

 #  फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के शिकार :-

दुनिया में हर दस में से 9 लोग इस समस्या से ग्रस्त है। इसमें लोगों को भ्रम होता है कि जेब या बैग में पड़ा उनका मोबाइल वाइब्रेट कर रहा है जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में हुई स्टडी में शामिल 90 प्रतिशत लोगों ने वाइब्रेशन महसूस किया, लेकिन वो सिर्फ भ्रम ही था। 

 #  हकीकोमोरी ( अकेले रहने की आदत ):-

इस बिमारी में व्यक्ति स्वंय को पुरे समाज से अलग समझने लगता है  और वह अपने आपको को एक सिमित दायरे के अंदर रख लेता है। एक शोध से यह पता चला है कि दुनिया में लगभग 2 लाख नौजवान हकीकोमोरी नाम  की इस समस्या से पीड़ित है। हिकीकोमोरी से ग्रसित लोगों की संख्या जापान में ज्यादा पाई गई है।इसमें व्यक्ति सारा दिन लगभग अपने घर के अंदर ही बिताने लगता है। और कई वर्षों तक ऐसे ही रहता है।


 #  इंटरनेट ( Addiction )की लत :-

इंटरनेट का उपयोग तो हम बहुत पहले से करते आ रहें है लेकिन जब से jio के मालिक मुकेश अंबानी जी ने इंटरनेट डाटा प्लान्स को सस्ता किया है तब से बहुत से लोगों को इंटरनेट की गहन रूप से लत ( Addiction ) लग चुकी है। गेम, ईमेल, और टेक्स्ट जैसी एक्टिविटीज़ के कारण ज्यादातर लोगों को इंटरनेट की लत लग चुकी है। यही वजह है कि जरा सा नेटवर्क से बाहर या Down होते ही हम बेचैनी व डिप्रेशन मह्सूस करने लगते है। 

 #  ज्यादा फ़ोन इस्तेमाल से सिरदर्द  :-

 कई स्टडीज में यह बात भी सामने आ चुकी है कि मोबाइल फ़ोन और सिरदर्द में कनेक्शन होता है। फ़ोन मैन्युफैक्चर्स की ओर से हुई एक रिसर्च में यह पाया गया है कि सोने से तुरंत पहले की गई चैट या कॉल, नींद पर विपरीत असर डालती है। इससे अच्छी नींद नहीं आती और अगले दिन आपको सिरदर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यह समस्या मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले हर दूसरे व्यक्ति में देखी जा सकती है। 

 #  3D हैंगओवर्स :-

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ ऑप्टोमीटरिस्ट की एक स्टडी में 3d से संबंधित टीवी, सोंग्स और गेमिंग के साइड इफेक्ट्स पाए गए है। शोध में 3डी देखने या सुनने वालों पर ओब्जेर्वेशन किया गया और पाया गया है कि लगातार 3डी देखने या सुनने वालों में आँखों पर जोर पड़ना, साफ़ दिखाई न देना, सुनाई कम देना, सुस्ती व चक्कर आना, सिरदर्द और जी मिचलाना जैसी समस्याएं दिखाई दी हैं। इसके अलावा मोशन सिकनेस यानी यात्रा के दौरान जिनकी तबीयत खराब होती है। उनमें 3डी कंटेंट ( गेमिंग, Songs और टीवी )की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। 


 #  फेसबुक डिप्रेशन :-

अमेरिकन अकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स का मानना है कि सायबर बुलिंग या फेसबुक पर किसी तरह के कमैंट्स या लाइक, अनलाइक मिलने का प्रभाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उम्मीद के अनुसार फेसबुक पर रिएक्शन न मिलने पर युवा डिप्रेशन में आने लगते है। साथ ही ऐसी वेबसाइट का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर यूजर्स की नींद व आत्म सम्मान के स्तर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।  


 #  साइबरकॉन्ड्रिया :-

अपनी बिमारी के लक्षण को ढूँढना और खुद को उस बिमारी से ग्रसित समझना। साथ ही सेहत से जुडी परेशानियों के बारे में पता लगाने की कोशिश करते रहना साइबर कॉन्ड्रिया बिमारी का लक्षण होता है। इसमें व्यक्ति ज्यादातर डिप्रेशन में रहता है उसे लगता है कि वह किसी बीमारी का शिकार है। 


 #  इलेक्ट्रोमेग्नेटिक हाइपरसेंसिटिव :-

हम सभी वाई-फाई को लेकर मोबाइल फ़ोन व अन्य वायरलेस कम्यूनिकेशन के साधनों के सिग्नल्स के घेरे में 24 घंटे रहते हैं। ऐसे में इनसे निकलने वाले इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फील्ड के संपर्क में हम लगातार रहते है। और विभिन तरह की बीमारियों को न्योता देते है। सिरदर्द, त्वचा में जलन, मसल्स में दर्द जैसे लक्षण इस समस्या में खासतौर पर देखने को मिलते है। 

 #  सेल्फाइटिस ( बार-बार सेल्फी लेना ):-

दिनभर में अगर 3 से ज्यादा सेल्फी लिए बिना आपका मन नहीं भरता है तो आप सेल्फाइटिस के शिकार है। लंदन की नॉर्टिंघम टेंट यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु की त्यागराजार स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के अनुसार सेल्फाइटिस डिसऑर्डर के तीन स्तर होते है। पहले स्तर में दिन में 3 से ज्यादा सेल्फी लेने की आदत होना, लेकिन सोशल मिडिया पर पोस्ट न करना। दूसरा सेल्फी सोशल मिडिया पर पोस्ट  करना और तीसरा हर समय सोशल मिडिया पर अपनी सेल्फी पोस्ट करना। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस समस्या से ग्रसित लोग अपना मूड ठीक करने, अपनी स्वीकार्यता दिलाने और दूसरों से आगे रहने के लिए बार-बार सेल्फी लेते है। 


 #  इन बीमारियों से कैसे बचें :- 

  • मोबाइल में अलार्म न सेट करें। ज्यादातर लोग अलार्म बंद करने के लिए मोबाइल को उठाते है और व्हाट्सएप, ईमेल, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि चेक करना शुरू कर देते है। और हम से बहुत से सज्जन इस समस्या से ग्रसित है। 
  • पर्याप्त नींद लेने के लिए फ़ोन रात को ऑफ करके सोएं। हाँ वो बात अलग है अगर आपको रात को कहीं जाना है या नाईट ड्यूटी है तो आप ऑन रख सकते है अन्यथा ऑफ़ ही रखें तो बेहतर होगा । 
  • फोन के नोटिफिकेशन्स को कस्टमाइज़ कर दें। और फोन में गैरजरुरी ऍप्स को न रखें। 
  • टाइम देखने के लिए घड़ी अवश्य पहने। ज्यादा जरूरी होने पर ही फ़ोन निकाले। घड़ी का फायदा यह होगा कि इससे आप अट्रैक्टिव भी लगोगे। 
  • अगर आप ऑफिस वगैरह में काम करते है और यदि ज्यादा जरूरी न हो तो ऑफिस पहुँचकर ही ईमेल वगैरह चेक करें। 
  • किताबों से दोस्ती करें या आमने-सामने लोगों से बात करें। सप्ताह में एक या दो-दिन हो सके तो मोबाइल से दुरी बनाएं। हमें पता है कि आज के दौर में ऐसा कर पाना काफी मुश्किल है पर एटलीस्ट आप कोशिश तो कर सकतें है। 

 #  Note :-

  • 10 में से 9 लोग फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम की समस्या से ग्रस्त है। 


 # Conclusion :-

टेक्नोलॉजी का अत्याधिक इस्तेमाल आपको भी बीमार बना सकता है। सेल्फाइटिस ( बार-बार सेल्फी लेने की आदत ), फैंटम रिंगिंग सिंड्रोम ( अचानक ऐसा लगना या सोचना कि फ़ोन वाइब्रेट हो रहा है ), नोमोफोबिया ( बार-बार मोबाइल फ़ोन चेक करना ), साइबरकॉन्ड्रिया ( हर समय अपने आपको किसी बिमारी से ग्रसित समझना ) व कई अन्य ऐसी बीमारियां अपना पैर पसार चुकी है, जिनके बारे में आप भले ही न जानते हो लेकिन इनका मुख्य कारण इंटरनेट व टेक्नोलॉजी ही है। अंत: आप कोशिश करें कि जितना हो सके इंटरनेट को एक लिमिट में Use करें। ताकि हमारा काम भी होता रहे और हमारे स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव भी न पड़े। 



 #  Extra Tips :- 


 #  गुस्से में पानी का सेवन बनाता है आपको कूल :-

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एक अध्ययन के अनुसार जब आप अपने आपे से बाहर हो तो पानी आपको शान्ति दे सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कनेक्टिकट के शोधकर्ताओं का दावा है कि शरीर में पानी की थोड़ी सी भी कमी होने से मूड पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। और महिलाओं पर यह बात खासतौर पर देखी जा सकती है। पानी से किसी का मिज़ाज़, ऊर्जा का स्तर और सही तरीके से सोचने की क्षमता बदल सकती है। 

 #  बेचैनी हो सकती है अल्माइजर बिमारी का संकेत :-

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अमेरिका के ब्रिघम एंड वीमेन हॉस्पिटल में हुए शोध के अनुसार, बुजुर्गों में लगातार बेचैनी की समस्या दिखे तो यह अल्माइजर के संकेत हो सकते है। अल्माइजर नर्वस सिस्टम से जुड़ा हुआ रोग है। जिसमें याद्दाश्त प्रभावित होने के साथ नियमित जीवनशैली पर भी प्रभाव पड़ता है। रिसर्च में सामने आया कि मस्तिष्क में एमाइलॉयड बीटा का स्तर बढ़ जाना भी बेचैनी का एक कारण हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।  



Last Words :-

दोस्तों ऊपर लिखे चरणों में से कोई ना कोई समस्या 
आपके साथ भी हुई होगी या वर्तमान में भी हो रही होगी । 
अगर है  तो अपने विचार हमारे साथ अवश्य साझे करें 
और हाँ हेल्थ को टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभाव से कैसे बचाएं 
( Technology Attack se kaise bache ) ये लेख आपको कैसा 
लगा ये भी जरूर बताएं।
हम मिलेंगें आपसे  फिर एक बार नए और फ्रेश आर्टिकल के साथ 
तब तक के लिए खुश रहे और स्वस्थ रहें। 
धन्यवाद।  

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