शरीर में घबराहट और बेचैनी का कारण और इससे बचने के उपाय

शरीर में घबराहट और बेचैनी का कारण और इससे बचने के उपाय 

शरीर में घबराहट और बेचैनी का कारण और इससे बचने के उपाय
क्या आपका दिल बेचैन रहता है या आपके दिल में घबराहट या फिर धड़कन तेज़ हो जाती है। आपकी आंखें नम हो जाती है और आप शोक के सागर में डूब जाते है। आपके चारों और भीड़ है। शोर है। लोग बहुत आनंद उठा रहे है लेकिन आप सुन्न, हैरान या शोक में डूबे हुए है आप न तो कुछ सुन पा रहे है और ना ही कुछ सोच पा रहे है। बस खुद को हताश, हारा हुआ और थका हुआ महसूस कर रहे है।

 आप कोई भी काम करते है तो उसमें आपका मन नहीं लगता है। हंसना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। आपको हमेशा किसी न किसी चीज की कमी खलती है आप सोचते है कि दूसरे इंसान आपके मुकाबले बहुत ज्यादा सुखी है। आपको हमेशा लगता है कि  कुछ नया करें लेकिन आप उसे कर नहीं पा रहे है। जबकि आपको यह भी पता नहीं होता कि आखिर आपको करना क्या है। 


 #  बेचैनी से बचने के लिए गलत आदतों का सहारा :-

अकेलेपन और हताशा से उबरने के लिए कुछ लोग ड्रग्स, शराब, सिगरेट का सहारा लेने लगते है। तो कुछ शहर की बदनाम गलियों में भटकने लगते है। कई नींद की गोलियां लेने लगते है। और कई अपने आपको सजा देकर छीजने लगते है और बीमार रहने लगते है। कुछ लोग जो ज्यादा समझदार होते है वो ज्यादा से ज्यादा काम करने लगते है। और खुद को व्यस्त रखने की हर सम्भव कोशिश करते है। यह बेचैनी सिर्फ गरीब या अभावग्रस्त लोग ही नहीं बल्कि धनी और पॉवरफुल लोग भी महसूस करते है। इसलिए इसका आर्थिक स्तर से कोई तालुक नहीं है।


 #  बेचैनी और घबराहट से निपटने के उपाय :-

डॉक्टरों के अनुसार हमें अपनी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षमता को समझना पड़ेगा। अपनी जरूरतों का सही-सही आंकलन करना पड़ेगा। ध्यान रखना होगा कि लक्ष्य तक हम रियलिस्टिक होकर ही बढ़ सकते है। कल्पनाओं के सागर में गोते लगाकर नहीं। हमें समझना होगा कि हर किसी को हर चीज नहीं मिल सकती। जो चीजें दूसरों के पास है, वो हासिल करना हमारा मकसद नहीं।

 हमारी जो मूलभूत जरूरतें है, उन्हीं को पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। हाँ, हमें भी अपने जीवनस्तर या अन्य क्षमताओं को बढ़ाने का हक है और बढ़ाना भी चाहिए। लेकिन रातों रात कुछ नहीं होगा। धीरे-धीरे मेहनत करने से होगा। कदम दर कदम होगा। बस न्यूरोस्थिनिया के मरीज़ को कोई सलाहकार, परिजन, मित्र या फिर वह खुद ही यह समझने में कामयाब हो जाए। तो उसकी ज़िंदगी वापस पटरी पर लौटने लगेगी।    

 #  बीमारी है ये बेचैनी और घबराहट :-

शरीर में घबराहट और बेचैनी का कारण और इससे बचने के उपाय
 Note  :- दरअसल घबराहट और बेचैनी एक बिमारी है जिसे मेडिकली भाषा में न्यूरोस्थेनिया कहते है। 

और इस नाम के संस्थापक है चर्चित अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट जॉर्ज मिलर बियर्ड। भारत के मनोचिकित्सक डॉ संजय गर्ग कहते है कि इस सिचुएशन में मरीज़ एक साथ डिप्रेशन, एंग्जायटी, पलपिटेशन ( धड़कन ) और थकान का शिकार हो जाता है। आज के हाईटेक और भौतिकवादी युग में इंसान की महत्वाकांक्षाएँ हद से ज्यादा अवास्तविकता की हद तक पहुँच गई है। 

अपने आसपास लोगों को अनापशनाप खर्च करते, उच्च स्तरीय जीवन व्यतीत करते देख हमारी लालसाएं बढ़ने लगती है। हम अपनी सीमाओं और वास्तविकताओं को भूलने लगे है। सिर्फ धन ही नहीं ऐसा किसी टैलेंट ( डांस, आर्ट, म्यूजिक ) या शारीरिक सौष्ठव के मामले में भी हो सकता है तकनीक का ओवरयूज भी हमें सोचने और देखने के लिए ग्लोबल परिदृश्य उपलब्ध करवा रहा है। इसके चलते भी हमारी उम्मीदें बढ़ने लगी है। हमारे शरीर का हर एक एक्शन तकनीक से प्रभावित होने लगा है। इनबॉक्स मैसेज की बीप-बीप या फ़ोन की घंटी बजते ही हम बिजली की गति से उसे देखने के लिए दौड़ते है। इससे ज़िन्दगी की गुणवत्ता कम हुई है। आराम की आदत छूटती जा रही है। न शरीर को आराम मिलता है न ही मन को। 


 #  Conclusion :-

क्या आपको हर वक़्त एक बेचैनी सी कचोटती है ? अकेलापन सा महसूस होता है ? ज़िन्दगी में कोई अनजानी सी कमी महसूस होती है ? आप मन ही मन घबराए हुए डरे हुए या दुखी से रहते है ? देर रात तक आपको नींद नहीं आती, और जब आपको नींद आती है तब तक दुनिया के जागने का समय हो जाता है ? अगर आप ऐसी समस्या से जूझ रहे है तो आप न्यूरोस्थिनिया के शिकार है। इससे बचने के लिए आपको खुद को ही समझना पड़ेगा। अपनी गैरजरूरी आवश्यकताओं को त्यागना होगा। तभी आप इससे छुटकारा पा सकते है। 


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 #  Extra Tips :-


 #  सर्फिंग से होता है दिमाग तेज़ :-

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सेहत वैज्ञानिकों द्वारा 55 से 75 वर्ष के लोगों पर एक दिलचस्प स्टडी की गई। इस स्टडी में पता चला की जो लोग नियमित नेट ( Internet ) सर्फिंग करते रहते है उनके ब्रेन का वो हिस्सा ज्यादा एक्टिव होता है जो रीडिंग, मेमोरी, लैंग्वेज लर्निंग और विज़ुअल एबिलिटी से संबंध रखता है। इसलिए रेगुलर सर्फिंग करने वालों में निर्णय, मुश्किल सिचुएशन से निकलने की क्षमता अधिक होती है। जाहिर सी बात है सर्फिंग से इनकी दिमागी कसरत होती रहती है यही वजह है कि इनका दिमाग तेज़ी से काम करता है। 

 #  हड्डियों में जान डालने का काम करता है चुकंदर :-

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चुकंदर का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। चुकंदर में मौजूद तत्व सोडियम, पौटेशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन बी1 और बी2 और विटामिन सी सेहत के लिए फायदेमंद होते है। चुकंदर में सिलिका नामक खनिज होता है। जो शरीर में कैल्शियम की उपयोगिता को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां स्वस्थ और मजबूत बनती है। और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। इसलिए हम यह कह सकते है कि चुकंदर हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। 


 #  गाने से मिलता है मानसिक सुकून :-

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स्वीडन के वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में यह पाया कि संगीत ( म्यूजिक ) में रूचि रखना और नियमित रूप से गाना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। गाने से ब्रीदिंग ( Breathing ) एक्सरसाइज होती है। मानसिक सुकून मिलता है। और हार्ट पर भी अच्छा असर पड़ता है। सामूहिक गान में शामिल लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि दीर्घअवधि में गायन का लाभ जरूर मिलता है। अमेरिकन स्टडी में भी यह पाया गया है।

 #  Final Words :-

हम उम्मीद करते है कि आपको
शरीर में घबराहट और बेचैनी का कारण और इससे बचने के उपाय
( Sharir mein ghabarahat aur baichaini ka kaarn aur isse bchne ke upay )
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