Depression के कारण लक्षण और उपाय - Depression ke karan lakshan aur upay in hindi.

Depression के कारण,लक्षण और उपाय 

Depression ke karan lakshan aur upay in hindi
World Health Organization (WHO) के अध्ययन के मुताबिक भारत अवसाद के मामले में अव्वल नम्बर पर है जितने भी अवसाद ग्रस्त देश है भारत उनमें पहले नंबर पर है। भारत में Depression का स्तर 36 प्रतिशत है जो दुनिया भी किसी देश से बहुत ज्यादा है। स्वास्थ्य Expert मानते है कि भारत में काम करने वाले Worker भी दूसरे देशों के Workers के मुकाबले ज्यादा डिप्रेस्ड रहते है। इसकी वजह उनके काम से लेकर उनकी निजी जिंदगी तक कुछ भी हो सकती है।

विषय-सूची :-
  1. डिप्रेशन क्या है - Depression kya hai.
  2. क्या होती है डिप्रेशन की स्थिति - Depression ki sthiti kya hoti hai .  
  3. डिप्रेशन (अवसाद) कितने प्रकार का होता है - Depression (Avsaad)kitne parkar ka hota hai. 
    1. प्रमुख अवसाद(Major Depression)
    2. मनोवैज्ञानिक अवसाद (Depression)
    3. प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर अवसाद
    4. द्विध्रुवी अवसाद (Bipolar Depression)
    5. Cyclothymic अवसाद
    6. मौसमी अवसाद
  4. डिप्रेशन के लक्षण क्या है - Depression (Avsaad) ke Lakshan kya hai.
  5. डिप्रेशन के मुख्य कारण क्या है - Depression (Avsaad) ke mukhya kaaran kya hai.
  6. डिप्रेशन से बचने के उपाय - Depression (Avsaad) se Bachne ke Upay
  7. डिप्रेशन का परीक्षण - Depression ka test in hindi
  8. Conclusion 


 #  डिप्रेशन क्या है ?

Depression(अवसाद) को मूड डिसऑर्डर(Disorder) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसे किसी भी व्यक्ति के जीवन में चल रही गतिविधियों में हस्तक्षेप के आधार पर पहचाना जा सकता है जैसे मूड खराब रहना, उदासी, हानि या क्रोध आना आदि ऐसे बहुत से Examples है जिनकी वजह से व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो सकता है। 
लोगों के जीवन को अवसाद (Depression) अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है यह आपके दैनिक जीवन में मुसीबत खड़ी कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप यह आपकी जीवनशैली को बहुत बुरी तरह प्रभावित  करता सकता है। यह संबंधों और कुछ पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों को भी प्रभावित कर सकता है। ये कुछ समस्याएं है जो आपको अवसाद के कारण झेलनी पड़ सकती है। 
  • Diabetes (डायबिटीज)
  • Obesity (मोटापा)
  • Cancer (कैंसर)
  • Asthma (दमा)
  • Arthritis (गठिया रोग) 
  • Heart diseases (हृदय रोग)
यह जानना महत्वपूर्ण है कि कभी-कभी अवसाद महसूस(Feelings) करना जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। सुख और दुःख जैसी घटनाएं हर किसी के जीवन में होती हैं। लेकिन, लगातार और लंबे समय तक दुख और निराशाजनक महसूस करना सामान्य(Normal) नहीं है। अवसाद को हल्के में नहीं लेना चाहिए यह एक Serious समस्या है अगर इसका इलाज़ न किया जाए तो यह काफी लंबा चल सकता है जो समय दर समय खराब होता जाएगा। इसलिए इसका Treatment बहुत जरूरी है।

 #  क्या होती है डिप्रेशन की स्थिति। 

डिप्रेशन की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब हम जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक रूप से सोचने लगते हैं या बर्ताव करने लगते है। जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति को अपना जीवन निरूद्देश्य लगने लगता है। जब मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिल पाता और उस पर हमेशा एक दबाव बना रहता है तो समझिए कि तनाव ने आपको अपनी चपेट में ले लिया है। तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन का स्तर बढ़ता जाता है, जिनमें एड्रीनलीन (Adrenaline​) और कार्टिसोल (Cortisol​) प्रमुख हैं। लगातार तनाव की स्थिति डिप्रेशन में बदल जाती है। डिप्रेशन एक गंभीर स्थिति है। हालांकि यह कोई रोग नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि आपका शरीर और जीवन असंतुलित हो गया है।

 #  Depression(अवसाद) कितने प्रकार का होता है :-

विभिन्न प्रकार के अवसादग्रस्त विकार हैं। लक्षण कई बार साधारण (लेकिन अभी भी अक्षम) से बहुत गंभीर हो सकते हैं, इसलिए परिस्थितियों और उनके अलग-अलग लक्षणों की सीमा से अवगत(जानकार) होना उपयोगी होता है।

 #  प्रमुख अवसाद(Major Depression) :- 

प्रमुख(Major) अवसादग्रस्तता विकार(Disorder) अवसाद का सबसे गंभीर रूप है। अवसाद(Depression) के लक्षण किसी व्यक्ति के जीवन के सभी क्षेत्रों में हस्तक्षेप करते हैं, जिसमें कार्य और सामाजिक संबंध शामिल हैं। यह उदासी, निराशा और बेकारता की लगातार भावनाओं की विशेषता है जो अपने आप दूर नहीं होती। Major अवसाद को समझने के लिए आपको एक- दो सप्ताह की अंदर निम्नलिखित लक्षणों में से अनुभवों से गुजरना पड़ सकता है जैसे :-
  • दिन में ज्यादातर उदासी महसूस करना। 
  • बहुत ज्यादा सोना या सोने का मन नहीं करना। 
  • मौत या आत्महत्या जैसे विचार आना। 
  • ज्यादातर अपने आपको थका और हारा हुआ समझना। 
  • दैनिक गतिविधियों में भाग लेने का मन न होना।
  • एकाग्रता ना होना।  
  • किसी के साथ बात करने का मन न करना। 

 #  मनोवैज्ञानिक अवसाद (Depression) :- 

कभी-कभी अवसादग्रस्तता वाले लोग वास्तविकता और अनुभव मनोविज्ञान के साथ संपर्क खो सकते हैं। इसमें भेदभाव (उन चीजों को देखना या सुनना) शामिल हो सकता है या भ्रम (झूठी मान्यताओं जो दूसरों द्वारा शेयर नहीं की जाती हैं), जैसे कि वे मुझे बुरा समझते या बुरा मानते हैं, या वे मेरी ओर देखे जा रहे हैं। कि आप पागल हो सकते हैं, ऐसा महसूस कर रहे हैं कि कोई आपके खिलाफ है या वे बीमारी या बुरी घटनाओं के कारण हैं। ऐसे -ऐसे लक्षण मनोविज्ञानिक अवसाद में देखने को मिल सकते है।

 #  प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर अवसाद :-

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अवसाद का खतरा अधिक होता है जिसे जन्मपूर्व या प्रसवपूर्व के रूप में जाना जाता है। और बच्चे के जन्म के बाद जिसे प्रसवपूर्व अवधि के रूप में जाना जाता है। आप इन दोनों अवस्थाओं को Perinatal भी बुला सकते हैं, जो गर्भावस्था से जुड़े समय और बच्चे के जन्म के पहले वर्ष का वर्णन करती है।

इस समय अवसाद के कारण काफी जटिल(Complex) हो सकते हैं और अक्सर यह परिणाम कारकों के संयोजन के होते हैं। जन्म के तुरंत बाद के दिनों में, कई महिलाओं को 'Baby blues' का अनुभव होता है जो हार्मोनल परिवर्तन से संबंधित एक आम स्थिति है और 80 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है। गर्भावस्था या एक नए बच्चे को समायोजित करने के लिए 'Baby blues' या सामान्य तनाव अनुभव होते हैं, लेकिन अवसाद(Depression) से अलग होते हैं।

 अगर अवसाद लंबे समय तक चल रहा है तो यह न केवल माँ को प्रभावित कर सकता है, बल्कि उसके बच्चे के साथ उसका रिश्ता, बच्चे के विकास, उसके साथी के साथ मां के रिश्ते और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ को भी प्रभावित कर सकता है। गर्भावस्था के दौरान लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं अवसाद का अनुभव करती है। बच्चे के होने के पहले तीन महीनों में यह समस्या 16 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

 #  द्विध्रुवी अवसाद (Bipolar Depression):-

द्विध्रुवीय विकार(अवसाद) को मैनिक अवसाद(Manic Depression) के रूप में जाना जाता था क्योंकि व्यक्ति को सामान्य मनोदशा की अवधि के साथ अवसाद और उन्माद की अवधि का भी अनुभव होता है। उन्माद अवसाद के विपरीत है और तीव्रता में भिन्न हो सकता है - इसके लक्षणों में जैसे है, बहुत सारी ऊर्जा, रेसिंग के विचार आना और नींद की थोड़ी सी आवश्यकता होना है, बहुत जल्दी बातें करना, कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना और निराशा और चिड़चिड़ाहट महसूस करना है। यह सिर्फ एक क्षणभंगुर अनुभव नहीं है। कभी-कभी व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो देता है और मनोविज्ञान के मायाजाल बुन लेता है। मनोविज्ञान के अनुभव में भेदभाव शामिल है (वह कुछ ऐसा नहीं देख रहा है या सुन रहा है) या उसे भ्रम हो रहा है। कि उदाहरण के लिए व्यक्ति को विश्वास है कि उसके पास महाशक्तियां(Superpowers) हैं)।

 #  Cyclothymic अवसाद :-

साइक्लोथिमिक(Cyclothymic) विकार को अक्सर द्विध्रुवीय विकार के हल्के रूप के रूप में वर्णित किया जाता है। व्यक्ति को कम से कम दो वर्षों में क्रोनिक उतार चढ़ाव के मूड का अनुभव होता है, जिसमें हाइपोमैनिया की अवधि (मस्तिष्क का हल्का से मध्यम स्तर) और अवसादग्रस्त लक्षणों की अवधि शामिल होती है, जिसमें बहुत कम अवधि (दो महीने से अधिक नहीं) के बीच सामान्यता होती है। लक्षणों की अवधि कम, कम गंभीर और नियमित रूप से नहीं होती है, और इसलिए द्विध्रुवीय विकार या प्रमुख अवसाद के मानदंडों में फिट नहीं होती है।

 #  मौसमी अवसाद :-

Seasonal affective disorder  एक मूड डिसऑर्डर है जिसमें मौसमी पैटर्न होता है। विकार(disorder) का कारण स्पष्ट नहीं होता है, लेकिन यह अलग-अलग मौसमों में प्रकाश एक्सपोजर में भिन्नता से संबंधित माना जाता है। यह मूड गड़बड़ी (या तो अवसाद या उन्माद की अवधि) द्वारा है जो किसी विशेष मौसम में शुरू होती है और समाप्त होती है। अवसाद जो सर्दियों में शुरू होता है और मौसम समाप्त होने पर घटता है सबसे आम है। सर्दियों के दौरान कुछ वर्षों के लिए व्यक्ति के समान लक्षण होने के बाद आमतौर पर इसका निदान किया जाता है। मौसमी अवसाद (Seasonal affective disorder) वाले लोगों को ऊर्जा की कमी का अनुभव होने की अधिक संभावना होती है, अधिक मात्रा में सोते हैं, अधिक वजन, कार्बोहाइड्रेट के लिए वजन कम करना और लालसा करना। आदि लक्षण मौसमी पैटर्न में देखे जा सकते है।

 #  डिप्रेशन के लक्षण क्या है। 


जैसा कि हम सभी जानते है कि समय-समय पर निराशा महसूस करना व्यक्ति के जीवन में स्वभाविक है पर अगर आपको इसके साथ अकेला और बेसहारा महसूस होने लगे तो यह डिप्रेशन (Depression) के लक्षण हो सकते हैं। डिप्रेशन आपके खुशनुमा जीवन को मुश्किल बना देता है। डिप्रेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। मगर इसके कुछ आम लक्षण हैं जिससे इसको पहचाना जा सकता है। दुनिया भर में लगभग 350 मिलियन लोग डिप्रेशन से प्रभावित होते हैं। लेकिन आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है। अब बहुत सी ऐसी तकनीकें उपलब्ध हैं जिसकी सहायता से आप डिप्रेशन (Depression) से छुटकारा पा सकते हैं। तो आइए जानते है डिप्रेशन से सम्बंधित कुछ मुख्य लक्षणों के बारे में :-


1. थकावट होना (Exhaustion) :- जब इंसान उदास होता है तो उसे कुछ करना अच्छा नहीं लगता है। साथ ही उसे कुछ करे बिना ही थकावट होने लगती है और अपना शरीर भारी सा महसूस होने लगता है।

2. नींद में गड़बड़ (Sleep disturbance) :- डिप्रेशन कई तरह के होते हैं, इसलिए नींद का कोई एक पैट्रन नहीं होता। कुछ लोग डिप्रेशन के कारण रात रात भर सो नहीं पाते। जबकि कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं।

3. पीठ में दर्द (back pain):- हमारी रीढ़ की हड्डी गर्दन से ले कर कूल्हे तक शरीर को संभालती है। ज्यादा तनाव से यह प्रभावित होती है और पीठ का दर्द शुरू होता है। कई लोगों को लगातार सर में दर्द भी रहता है जो दवाओं से भी दूर नहीं होता है।

4. चिड़चिड़ापन (Irritability):- स्वभाव में अगर चिड़चिड़ापन रहने लगे और यह आपकी आदत बन जाए तो इसके लिए आपको गम्भीरता बरतनी पड़ेगी क्योंकि यह डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा लक्षण है। इसके लिए आपको डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति से लड़ने की बजाए उससे शांति से बात करनी चाहिए और उसे समझना चाहिए।

5. वजन में बदलाव (Weight change) :- डिप्रेशन में आपके वजन में बदलाव होता है। कुछ लोगों का वजन बढ़ जाता है तो कुछ लोगों का वजन घट जाता है। डिप्रेशन में इंसान के वजन में 5% का बदलाव हर महीने होता है।

6. एकाग्रता में कमी (Decrease in concentration) :- डिप्रेशन में आपके दिमाग में कई तरह की बातें चलती रहती हैं, जिस वजह से आप अपने काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं और महत्वपूर्ण कामों से आपका ध्यान हटने लगता है। जिसकी वजह से आप कई बातें भूलने भी लगते हैं।

7. क्रोध (Anger) :- डिप्रेशन में आप बेचैन, उत्तेजित और यहां तक की हिंसक भी हो जाते हैं। आपके सहन करने की क्षमता कम हो जाती है और आपको बहुत जल्दी और ज्यादा गुस्सा आने लगता है।

8. डर (Phobia, The fear) :- डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के मन में अगर किसी तरह का डर बैठ जाता है तो वह उसे ही सच मान लेता है और उसी के बारे में सोचने लगता है। जैसे- अंधेरे, बंद कमरे या किसी व्यक्ति का डर।

9. खराब हाजमा :-  आप सोच रहे होंगे कि भला दिमाग का हाजमे से क्या लेना देना हो सकता है? याद कीजिए बचपन में परीक्षा के डर से कैसे पेट खराब हो जाया करता था। डिप्रेस्ड इंसान हर वक्त उसी अनुभव से गुजरता है।

10. नकारात्मक विचार (Negative thoughts) :- डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को सबसे ज्यादा नकारात्मक विचार आते हैं। जिसमें वह दूसरो को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ खुद को भी नुकसान पहुंचाने की सोचते हैं। यह विचार सपने में भी उनका पीछा नहीं छोड़ते हैं।

11. दैनिक गतिविधियों में बदलाव (Changes in daily activities) :- डिप्रेशन में आप अपनी रोज़मर्रा के काम के बारे में भूल जाते हैं। रोज के काम जैसे आपकी सोशल एक्टिविटी, हॉबी आदि। आप अपनी खुशी महसूस करने की क्षमता भी खो देते हैं।

12. अस्पष्टीकृत दर्द (Unexplained pain) :- तनाव के कारण आपके शरीर के कई हिस्सो में दर्द शुरू हो जाता है। जैसे सिर दर्द, पेट दर्द और कमर दर्द। जिन पर दवाओं का भी असर नहीं होता है।

13. आनंददायक या मजेदार एवं पसंदीदा गतिविधियों से भी दुरी बनाने लगना। 

14. दुसरों से अलग-अलग रहने लगना और विश्वास में भी कमी आना। 

15. छोटी छोटी बातों पर बैचेन हो जाना।

16. हर जगह अपने आप को गलत महसूस करना।

17. हर सही बात में भी गलत नजर आना।

18. लोगों के बीच में होते हुए भी अपने आप को अकेला महसूस करना।

19. खाना खाने का या तो बिलकुल मन नहीं करता या फिर बहुत खाने का मन करता है। 

20. दिन में ज्यादातर उदासी रहती है। 

21. रात को नींद नहीं आती। 

22. बहुत ज्यादा क्रोध आता है या फिर रोने को मन करता है। 

23. Confidence में कमी महसूस होती है। 

24. कोई भी काम करने को मन नहीं करता है। 

25. दिन में ऊर्जा की कमी महसूस रहती है।  

 #  डिप्रेशन के मुख्य कारण क्या है ?

Depression किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है और डिप्रेशन होने का कोई स्पष्ट कारण नही है, यह कई मिलेजुले कारणों से होता है। तो चलिए जानते हैं डिप्रेशन से जुड़े मुख्य कारण कौन से है -​

1. मानसिक कमजोरी ( Mental Weakness) - मानसिक कमजोरी व्यक्ति को किसी भी कारण से हो सकती है। जैसे कि अपमान (Insult), भय, आत्मविश्वास की कमी, ऑफिस के कठोर नियम, इर्ष्या, प्यार का अभाव, कोई नुकसान, प्रियजन की मृत्यु इत्यादि। मानसिक कमजोरी ही डिप्रेशन (Depression) का पहला कारण होता है।​

2. रोग ( Diseases) - मानसिक कमजोरी के साथ-साथ कुछ लोग अपनी शारीरिक कमजोरी और रोगों के कारण भी अधिक चिंतित रहने लगते है जो धीरे धीरे उनके मानसिक संतुलन को खराब करने लगती है। और ये परेशानी ही उनके डिप्रेशन (Depression) का कारण बन जाती है।​

3. आनुवंशिकी (Genetics) - डिप्रेशन (Depression) वंशानुगत से हो सकता। यदि आपके परिवार में पहले किसी सदस्य को कभी डिप्रेशन हुआ हो तो आप भी डिप्रेशन का अनुभव कर सकते हैं। अभी तक यह पता नहीं चला है की डिप्रेशन (Depression) में कौन सा जीन शामिल है।​

4. अकेलापन ( Loneliness) - अकेलापन व्यक्ति के जीवन में बहुत गलत प्रभाव डालता है। आपने सुना ही होगा कि अकेले घर में भूत वास करते है तो सोचो अकेले व्यक्ति के मन में कैसे कैसे विचार आते होंगे। यही सब बातें उसे डिप्रेशन (Depression) की तरफ धकेलती है। आजकल युवा वर्ग में ये कारण अधिक पाया जाता है जब उनका प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देते है तो वो खुद को अकेला महसूस करने लगते है और डिप्रेशन (Depression) का शिकार हो जाते है।​

5. दिमाग में परिवर्तन (Brain Chemical Imbalance) - कुछ लोगों के दिमाग में परिवर्तन के कारण डिप्रेशन जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि अभी तक इसके कारण का पता नहीं चला है, यह माना जाता है कि डिप्रेशन मस्तिष्क के कामकाज के प्रवाभित होने से शुरू होता है। इसलिए कुछ मनोचिकित्सक डिप्रेशन के मामलों में मस्तिष्क रसायन विज्ञान (Brain Chemistry) की मदद लेते हैं। मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitters), विशेष रूप से सेरोटोनिन (Serotonin), डोपामाइन (Dopamine) या नोरेपेनेफ्रिन (Norepinephrine) खुशी और आनंद की भावनाओं को प्रभावित करते हैं और डिप्रेशन की स्तिथि में ये असंतुलित हो सकते हैं।

6. हार्मोन परिवर्तन (Hormone Imbalance) - हार्मोन उत्पादन या हार्मोन के कामकाज में परिवर्तन से भी डिप्रेशन की शुरुआत हो सकती है। हार्मोन में भी बदलाव जैसे रजोनिवृत्ति, प्रसव, थायरॉयड समस्या या अन्य विकार के दौरान बदलाव भी डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं।​​
पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) में बच्चे के जन्म के बाद माताओं में डिप्रेशन की समस्या हो जाती है। हालांकि हार्मोन्स में बदलाव के कारण संवेदनशील होना काफी सामान्य है, लेकिन पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक गंभीर समस्या है।​

7. मौसम में परिवर्तन (Seasonal Changes) - सर्दियों में जब दिन छोटे हो जाते हैं, बहुत से लोग सुस्ती, थकान और रोज़मर्रा के कार्यों में रूचि ना रख पाना अनुभव करते हैं। इस समस्या को मौसम प्रभावित विकार (SAD) कहा जाता है। यह स्थिति आमतौर पर सर्दियां ख़त्म होने पर समाप्त हो जाती है।​

8. जीवन में बड़ा परिवर्तन (Situational Causes) - जीवन में हुआ बड़ा परिवर्तन या संघर्ष डिप्रेशन (Depression) जैसी समस्या को बढ़ा सकता है। किसी अपने को खो देना, नौकरी से निकाल दिया जाना, धन से सम्बंधित परेशानियों का सामना करना या कोई और गंभीर बदलाव लोगों में डिप्रेशन की समस्या को जन्म देते हैं।

 #  डिप्रेशन से बचने के उपाय।   

 Depression ke karan lakshan aur upay in hindi

  1. Exercise करें :- व्यायाम शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। रोजाना 30 मिनट की Walking, Running, Deep breathing और योग से शरीर में एंडोरफिंस का उत्सर्जन(Emission) होता है। जो डिप्रेशन से हमें दूर रखने में काफी सहायता करता है। 
  2. व्यस्त रहने की कोशिश करें :- घर पर खाली ना बैठें, कोई ना कोई काम अवश्य करते रहे। क्योंकि आपने सुना तो होगा ही कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इसलिए आप कोई भी अपना मनपसंद काम कर सकते है जैसे Books पढ़ सकते है, लिख सकते है, संगीत सुन सकते है, पार्क में जा सकते है, गेम्स खेल सकते है आदि ऐसी बहुत सी एक्टिविटीज़ है जिन्हे आप घर पर अकेले और किसी दोस्त के साथ भी कर सकते है।        
  3. अपनी चिंता को शेयर करें :- अगर आपके Mind में कोई बात आपको तंग कर रही है या आप परेशानी के दौर से गुजर रहे है तो अपनी परेशानी अपने किसी दोस्त या फैमिली मेंबर से जरूर शेयर करें। अगर आप अपनी परेशानी किसी से शेयर करेंगें तो हो सकता है कि आपको अपनी परेशानी का Solution मिल जाए। और अगर आप अपना दुःख किसी से शेयर करते है तो आपका दुःख कम भी होगा  और आपको सुकून भी मिलेगा। 
  4. पॉजिटिव सोचें :- नकारात्मक बातों को छोड़कर सकारात्मक बातों की और ध्यान दें। दिन रात Problems के बारे में सोचने से कुछ हल नहीं होगा। अपने आपको विश्वास दिलाएं कि चिंता करने से किसी भी समस्या(Problem) को हल नहीं किया जा सकता है। इसलिए सकारात्मक सोच रखें। 
  5.  अपने आहार में बदलाव लाएं :- Vitamins और मिनरल्स से भरपूर आहार को अपनी रोजाना की Diet में शामिल करें। अपने आहार में दूध, दही, पनीर, साबुत अनाज, ताजा फ्रूट्स और सब्जियाँ शामिल करें। 
  6. Medicine का ध्यान से Use करें :- कुछ Medicines के Side Effect से भी Depression होता है। जैसे High Blood pressure की Medicine, एरीदमैटिक,Glaucoma, नींद की दवाएं आदि।   

 #  डिप्रेशन का परीक्षण। 

डॉक्टर Depression की अवस्था में निम्नलिखित ढंग से परीक्षण कर सकते हैं -

1. शारीरिक परिक्षण (Physical Examination) :- Doctor आपका शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं, और आपसे आपके स्वस्थ्य से सम्बंधित सवाल भी पूछ सकतें हैं। कुछ मामलों में, डिप्रेशन शारीरिक समस्याओं के कारण होता है।

2. प्रयोगशाला परीक्षण (Laboratory Test) :- डॉक्टर रक्त की जांच करवा सकतें हैं। जिसे पूर्ण रक्त जांच कहा जाता है, या थायरॉयड का परीक्षण कर सकतें हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह ठीक से काम कर रहा है।

3. मनो-चिकित्सा संबंधी परिक्षण (Psychoanalytic Examination) :- डॉक्टर आपके लक्षण, विचार, भावनाओं और व्यवहार से सम्बंधित सवाल पूछते है, इन सवालों के जवाब देने के लिए आपको एक प्रश्नावली भरने के लिए कहा जा सकता है।

 #  Conclusion :-

Health Expert का मानना है की Depression की समस्या को समय पर पहचानना और फिर कठोरता(Stiffness) से उसका ट्रीटमेंट करना बहुत आवश्यक है। इसलिए जब भी आपको डिप्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें। तो शीघ्र से शीघ्र चिकत्सक से परामर्श लें और अपना इलाज़ करवाएं। क्योंकि डिप्रेशन आपकी सारी खुशियां छीन सकता है। आपके रिश्तों में दरार डाल सकता है वगरैह-वगरैह।  बाकी आप Article में बताए गए Steps को भी Follow कर सकते है।


Extra Tips :-

 #  च्युंगम करती है दांतों की सफाई :-

 Depression ke karan lakshan aur upay in hindi
Food Expert की मानें तो च्युंगम खाने से अकेले  मुंह की बदबू ही दूर नहीं होती बल्कि इसके और भी फायदे है जैसे च्युंगम चबाने से दांतों में फंसे खाने के कण भी इसके साथ चिपक कर लार के जरिए हमारे पेट के अंदर पहुँच जाते है। जिससे मुंह की सफाई हो जाती है। और इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इस क्रिया से हमारे मुंह में बैक्टीरिया पैदा नहीं है। Chewing gum चबाने से लार पैदा होती है। जिससे पेट में खाना आसानी से पच जाता है। 

 #  20 Minute की Walk से Immune System होगा मजबूत :- 

प्रतिदिन 20 Minute की Exercise शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत बनाती है। California में हुई एक स्टडी के अनुसार Walk या Treadmill वर्कआउट एंटी-इंफ्लेमेट्री Treatment की तरह भी काम करती है। इस दौरान नर्वस सिस्टम पूरी तरह से Active हो जाता है। और कुछ ख़ास Hormone शरीर में स्त्रावित होने लगते है। जो हमारे रोग प्रतिरोधी तंत्र को मजबूती देते है। इसके अलावा शरीर में सूजन की समस्या से भी वॉक से निजात मिलती है। 

 #  Last Words :-    

तो Friends ये था आज का Article.  
( Depression ke karan lakshan aur upay in hindi )
आपको ये आर्टिकल कैसा लगा अपने 
विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं 
उम्मीद करते है आपको इस आर्टिकल के माध्यम से कुछ सिखने 
को मिला होगा। 
हम मिलेंगें आपसे Next आर्टिकल में तब तक के लिए 
खुश रहिए और स्वस्थ रहिए। 
धन्यवाद। 

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2 Comments

  1. Thanks sir ji
    This site very usefull to me

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    Replies
    1. Thank you very much Sammy sot ji..
      Aise hi apna pyar bnaaye Rakhein

      Regards
      Sandeep jain☺

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