Antibiotics क्या है इनके फायदे और नुकसान क्या है Antibiotics advantages and disadvantages in hindi

Antibiotics क्या है इनके फायदे और नुकसान क्या है Antibiotics advantages and disadvantages in hindi

Antibiotics advantages and disadvantages in hindi
एंटीबायोटिक्स(Antibiotics) शक्तिशाली दवाएं हैं जो संक्रमण से लड़ती हैं Antibiotics का सही तरीके से उपयोग किए जाने पर यह जीवन को बचा सकती हैं। एंटीबायोटिक्स(Antibiotics) जिन्हें एंटीबैक्टीरियल (Antibacterials) के रूप में भी जाना जाता है। एंटीबायोटिक्स हमारे शरीर में बैक्टीरिया के विकास को नष्ट या धीमा करने का काम करते है। एंटीबायोटिक्स में शक्तिशाली दवाओं का मिश्रण होता है जो हमारी बॉडी में बैक्टीरिया के कारण पैदा होने वाली बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करते है। बैक्टीरिया की संख्या अधिक होने पर हमारी प्रतीक्षा प्रणाली उन्हें नष्ट कर सकती है।

 सफेद रक्त कोशिकाएं बैक्टीरिया पर हमला करती है और अगर लक्षण अधिक गंभीर हो जाए तो प्रतीक्षा प्रणाली उनसे लड़ नहीं सकती है। इस स्थिति में एंटीबायोटिक्स का सेवन किया जाता है। लेकिन कई स्टडीज के मुताबिक यह साबित हो चुका है कि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कुछ ही बीमारियों में हमारी मदद करता है मतलब कि कुछ ही ऐसी बिमारियां जिनमें एंटीबायोटिक्स अपना असर दिखाती है। इसलिए जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स का सेवन नुकसानदायक ही है। तो आज दोस्तों हम इसी विषय पर बात करने वाले है कि एंटीबायोटिक्स क्या है और एंटीबायोटिक्स के फायदे और नुकसान क्या है। :-

 #  एंटीबायोटिक्स के Fact :-

  • पहले एंटीबायोटिक की खोज करने वाले अलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग(Alexander Fleming) थे। 
  • पहला एंटीबायोटिक पेनिसिलिन(Penicillin) था। जिसकी खोज 1928 में सेंट मैरी हॉस्पिटल, लंदन में अलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग की। 
  • पेनिसिलिन पर आधारित एंटीबायोटिक्स एम्पिसिलिन, एमोक्सिसिलिन आदि। 
  • एंटीबायोटिक की खोज के बाद संक्रमण से होने वाली मृत्यु दरों में काफी सुधार देखने को मिला। 
आपको जानकर ताजुब होगा कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ एंटीबायोटिक्स का भारी मात्रा में सेवन किया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 13 Billion एंटीबायोटिक्स का सेवन किया जाता है।  भारत के मुकाबले चीन में एंटीबायोटिक्स को सेवन करने की संख्या कम है चीन में प्रतिवर्ष लगभग 10 Billion एंटीबायोटिक्स को सेवन किया जाता है। वहीं अगर USA (United States America) की बात करें तो अमेरिका में हर साल लगभग सात बिलियन के आसपास एंटीबायोटिक्स का सेवन किया जाता है। यह सभी आंकड़ें 2015 की रिपोर्ट पर आधारित है।

 इनको जानकर इतना तो आप अंदाजा लगा ही सकते है कि वर्तमान में Antibiotics के सेवन का क्या आंकड़ा होगा। भारत में लोग एंटीबायोटिक्स के एडिक्ट हो चुके है। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। वर्तमान में एंटीबायोटिक्स की बैक्टीरिया से लड़ने की गति थोड़ी कम हो चुकी है और लोग थोड़ी सी परेशानी होने पर एंटीबायोटिक्स का सेवन करते रहते, बजाय किसी चिकित्सक से जांच कराने के और इसी वजह से आज छोटी-छोटी समस्याएं बड़ी गंभीर बीमारियों का रूप ले रहीं है।  

 #  आजकल Antibiotics काम क्यों नहीं करती है :-

Antibiotics का काम होता है कि हमारे बॉडी में पैदा हुए बैक्टीरिया को नष्ट करना है। क्योंकि बैक्टीरिया संक्रमण को बढ़ाते है। इसलिए एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया से लड़ती है और उनकी गति को धीमा करती है। परतुं होता क्या है कि हम बिना बिमारी का पता लगाए, बिना चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक्स का Use करने लगते है। जिसके परिणामस्वरूप हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। और इसके साथ-साथ एंटीबायोटिक्स भी अपना असर करना बंद कर देती है।

आमतौर पर Antibiotics शरीर में पैदा होने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए जानी जाती है। लेकिन ज्यादा मात्रा में Antibiotics के सेवन करने से यह शरीर में नुकसान पहुंचाने लगती है क्योंकि ज्यादा सेवन से Antibiotics उन बैक्टीरिया को भी नष्ट करने लगती है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते है।

इसके अतिरिक्त बहुत से लोग Antibiotics का बिना जांचें परखे सेवन करने लगते है और उन्हें पता ही नहीं होता है कि Antibiotic सिर्फ बैक्टीरियल संक्रमण में काम करती है इसके अलावा Viral Infection सर्दी-ज़ुकाम, खांसी, नाक बहना इत्यादि के Case में Antibiotics काम नहीं करती। इनके लिए अक्सर अलग प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। 

 #  Antibiotics का सेवन क्यों और कब करें :- 

डॉक्टरों के मुताबिक एंटीबायोटिक्स उन्हीं रोगों पर अपना काम कर सकती है जो बैक्टीरिया द्वारा पैदा हुआ हों। भारत में 80 प्रतिशत संक्रमण रोगों का कारण Virus होता है। और Virus में Antibiotics का सेवन करना मुनासिफ नहीं है। मतलब की नुकसानदायक है। लोग बिना सोचे-समझे Antibiotics का सेवन करते जा रहे है पर इस बात को भूल रहे है कि इनसे उनकी बॉडी पर दुष्प्रभाव पड़ता है और उनके शरीर के अच्छे बैक्टीरिया जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है उनकी संख्या में कमी आती जा रही है। परिणामस्वरूप हम संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ रहें है इसलिए किसी भी Antibiotic का Use करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। क्योंकि प्रतिदिन Antibiotics की Heavy Dose लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाएगी। और यही कारण है कि आजकल एंटीबायोटिक्स बहुत कम असर दिखा रहीं है।

 #  Bacteria और Virus में का अंतर है :- 

Bacteria सजीव होते है। Bacteria 2 प्रकार के होते है अच्छे और बुरे। अच्छे Bacteria शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते है, वहीं बुरे Bacteria हमें नुकसान पहुंचाते है। ज्यादा मात्रा में एंटीबायोटिक का सेवन करने से अच्छे बैक्टीरिया की शरीर में कमी आ जाती है परिणामस्वरूप बीमारियां हमें आसानी से घेर लेती है। Sinus Infection, ब्रोंकाइटिस(Bronchitis), निमोनिया(Pneumonia) और त्वचा संक्रमण आदि की वजह बैक्टीरिया है। इसलिए एंटीबायोटिक लेने से पहले अपने नजदीकी चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें। एलर्जी(Allergy), ज़ुकाम, ठंड, फ्लू, इत्यादि होने की वजह वायरस है एंटीबायोटिक्स वायरस से हुई बीमारी को ठीक नहीं कर सकती। इसलिए ऐसी स्थिति में Antibiotics से दूर ही रहें तो अच्छा होगा।

 #  Antibiotics के Side Effect क्या है :- 

Antibiotics advantages and disadvantages in hindi
एमोक्सिल ( Amoxicillin)  एक पेनिसिलिन से संबंधित एंटीबायोटिक होता है जो बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है जो बी-लैक्टैमेज़ नकारात्मक (बी-लैक्टैमेज़ पॉजिटिव बैक्टीरिया आम तौर पर अमोक्सिल प्रतिरोधी होते हैं); ये संक्रमण आमतौर पर त्वचा, फेफड़ों, मूत्र रस्ते और आंख, कान, नाक, और गले में होते हैं। एमोक्सिल एक सामान्य दवा के रूप में उपलब्ध है जिसे अमोक्सिसिलिन( Amoxicillin) कहा जाता है। एंटीबायोटिक को अधिक प्रभावी बनाने के लिए, अमोक्सिल को अन्य दवाओं के साथ जोड़ा जा सकता है। Amoxicillin के कुछ Side Effects :-

  • दस्त 
  • पेट दर्द 
  • उलटी 
  • जी मिचलाना 
  • सिरदर्द 
  • Vagina में खुजली 
  • Skin Rashes 
  • जॉन्डिस 
एमोक्सिल आपको Medical Stores से कई तरह की पैकिंग में उपलब्ध हो सकती है जैसे कैप्सूल, टैबलेट, चबाने योग्य गोलियाँ, मौखिक निलंबन(oral suspension) के लिए पाउडर। आमॉक्सिल की गंभीर प्रतिक्रियाओं में एनाफिलेक्टिक(Anaphylactic) प्रतिक्रियाएं शामिल हैं जो जीवन को खतरे में डाल सकती हैं; पेनिसिलिन से एलर्जी वाले रोगी को एमोक्सिल(Amoxil) नहीं दिया जाना चाहिए। एंटीबायोटिक्स के  कुछ और Side Effects :-

  • Allergy (एलर्जी) :- एंटीबायोटिक्स से एलर्जी भी हो सकती है। एलर्जी के लक्षण सामान्य और गंभीर दोनों हो सकते है। जैसे कि एंटीबायोटिक लेने के बाद सांस लेने में दिक़्क़त आना, गले या जीभ में सूजन आना इत्यादि दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते है इसके अतिरिक्त कुछ ख़ास Medicines(दवाइयां) ब्लड में भी Reaction का कारण हो सकती है ल्यूकोपीनिया(Leucopenia) White Blood Cells की संख्या को कम करता है। थ्रोम्बोसाइटोपिनिया ( Thrombocytopenia ) में Changes होने से प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है। इससे रक्त स्त्राव(Bleeding), थक्का जमना (Clot), आदि लक्षण सामने आ सकते है।
  • पेट खराब होना :- एंटीबायोटिक्स के सेवन से हमारे पेट में भी गड़बड़ होने लगती है और भी पेट से जुडी बहुत सी समस्याएं हो सकती है जैसे Stomach Pain(पेट दर्द), उल्टी आना, Diarrhea आदि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लें। 
  • दांतों का खराब होना :- एंटीबायोटिक्स के ज्यादा इस्तेमाल से दाँतों के ख़राब होने का खतरा भी बढ़ जाता है। टेट्रासाइक्लिन और डॉक्सीसाइक्लिन एंटीबायोटिक्स के सेवन से दांतों के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है या फिर दांतों का रंग बिगड़ जाता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना(Immunity) :- लगभग एक से दो किलो जीवाणु और खमीर(Yeast) हमारी आँतों में मौजूद होते है। जिनमें से कुछ बुरे और कुछ अच्छे जीवाणु होते है जो पाचन के साथ-साथ विटामिन बनाने का महत्वपूर्ण काम करते है लेकिन एंटीबायोटिक के अधिक सेवन से खमीर की मात्रा दोगुनी हो जाती है और Dysbiosis की स्थिति आ जाती है। और इसके परिणामस्वरूप हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो जाती है। 
  • भारी खुराक (Heavy Dose) :- World Antibiotics के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में लगभग 63,200 टन Antibiotics जानवरों यानी पशुओं की दी गई। वहीं शोधकर्ताओं के अनुसार 2030 से 35 तक यह आंकड़ा बढ़कर एक लाख पांच हजार छह सो टन हो जाएगा। पशुओं से मांस की बढ़ोतरी के लिए Antibiotics दिए गए। जैसे-जैसे जानवरों को मोटा करने के लिए Antibiotics दी जाएंगीं वैसे-वैसे यह चीज इंसान के जीवन के लिए काफी खतरनाक साबित होगी।       
  • Unbalanced Metabolism(मेटाबॉलिज़्म) :- शोधकर्ताओं के मुताबिक एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से हमारे Stomach के अंदर इनका स्वरूप बदल जाता है। पेट के अंदर कुछ खराब और कुछ अच्छे बैक्टीरिया होते है और इन एंटीबायोटिक्स का लंबे समय तक सेवन करने से Metabolism असंतुलित हो जाता है। Metabolism कम होने के कारण हमारे शरीर में जो अच्छे बैक्टीरिया है उनकी संख्या में भारी मात्रा में गिरावट आने लगती है। और खतरनाक और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने लगती है। परिणामस्वरूप अग्नाशय का संतुलन स्थिर नहीं रहता है और Diabetes की आशंका बढ़ जाती है। 
  • Diabetes होने का खतरा :- अगर आपको बुखार, खांसी या ज़ुकाम है तो ऐसी स्थति में एंटीबायोटिक्स से दूर ही रहें तो अच्छा होगा। क्योंकि इस स्थिति में आपको मदुमेह(डायबिटीज) हो सकता है। अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से डायबिटीज होने की संभावना 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। एक स्टडी में पता चला है कि पूरी दुनिया में डायबिटीज के मरीज भारत में सबसे ज्यादा है। इसलिए हमें एंटीबायोटिक्स सेवन करने पर सख्ती से कदम उठाने होंगें।     

 #  Antibiotics के Side Effect से कैसे बचें :-

  • Antibiotics के दुष्प्रभाव से बचने के लिए धूम्रपान और अल्कोहल से जितना हो सके दूर रहें। हैल्दी भोजन का सेवन करें और सोडा, Chocolate और ज्यादा मीठे से सावधानी बरतें। वसायुक्त और मसालेदार भोजन से दूर रहें, चाय और कॉफ़ी का सेवन कम करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिने की कोशिश करें।    
  • अगर आप लगातार लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का सेवन करते है तो इससे आपके पाचन तंत्र बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए कोशिश करें की ज्यादा भारी मात्रा में खाना न खाएं। 
  • Antibiotics के अटैक को कम करने के लिए आप लहसुन का सेवन कर सकते है लहसुन क्योंकि इसमें पाया जाने वाला एलिसिन तत्व एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव को कम करने में काफी सहायक है। 
  • Vitamins भी एंटीबायोटिक्स के Side Effect को कम करने में हमारी मदद करते है। 
  •  अगर आपको Antibiotics के प्रकोप से बचना है तो अपने घर में इन्हे ना ही रखें तो बेहतर होगा। अगर कुछ हद तक इनका सेवन करते है तो एक्सपायरी Date जरूर जांचे। बिना चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक्स और घर में पड़ी हुई पुरानी दवाओं का सेवन न करें। दवाओं का सेवन उतनी ही Dose में करें जितना डॉक्टर द्वारा बोला गया हो। 

 #  Note :-

  • डायबिटीज के मरीज़, दिल की बीमारी के मरीज़, 70 वर्ष से अधिक आयु वालों को, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो इन सभी को एंटीबायोटिक्स के सेवन से परहेज करना चाहिए। 
  • भारत में सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक्स का सेवन किया जाता है। तो इस स्थिति में सुधार लाने की कोशिश करें। 
  • देश में 80 प्रतिशत रोग Virus के कारण होते है ऐसे में इन रोगियों को एंटीबायोटिक्स देना गलत बात है। 
  • अगर आप खांसी, ज़ुकाम आदि में एंटीबायोटिक्स का सेवन करते है तो आपको 50 प्रतिशत मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है। 

 #  Read Also :-


 #  Conclusion

अगर आप Antibiotics का सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के अपनी बीमारी का इलाज़ करने के लिए लेते है। तो आज और अभी से सतर्क हो जाइए। क्योंकि एंटीबायोटिक्स का ज्यादा सेवन न केवल आपके दिमाग को प्रभावित करके आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है बल्कि इसके ज्यादा सेवन से आपके शरीर में अच्छे बैक्टीरिया भी समाप्त हो जाते है जिसकी वजह से आपको एंटीबायोटिक्स असर करना बंद कर देती है और डॉक्टर से सलाह ना लेने की वजह से छोटी-छोटी समस्याएं भी बड़ी बीमारियों का रूप ले लेती है। इसलिए हम आपसे तहेदिल से कहना चाहेंगें कि कृपया Antibiotics को अपने से दूर ही रखेंगें तो अच्छा होगा।  

 #  Final Words :-

तो दोस्तों ये था एंटीबायोटिक्स से संबंधित
 आज का आर्टिकल ( Antibiotics क्या है इनके फायदे और नुकसान क्या है )
 अब तो आपको समझ आ ही गया होगा कि Antibiotics किस हद तक हमें नुकसान 
पहुंचा सकती है।  हम उम्मीद करते है आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। 
अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। 
अगर आप अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक / सचेत रहना चाहते है तो 
आप इस साइट को सब्सक्राइब कर सकते है ताकि आपको हमारे द्वारा जो 
आर्टिकल पब्लिश किया जाए उसकी सूचना आसानी से मिल सके। 
धन्यवाद। 

Post a Comment

0 Comments

All Rights Reserved - Hashwh.com - 2018