दिल के रोग से बचने के बेहतरीन उपाय - Dil ke Rog ke Lakshan, Kaaran, aur isse bachne ke upay.

आजकल की इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में जहां सुख सुविधाओं की कमी नहीं, खानपान के तरीके भी अप्राकृतिक हो चुके है, वहीं बड़े-बड़े रोगों ने यहां अपने पैर पसार लिए है। इनमें से 'हृदय' रोग मुख्य है। यह पहले केवल अमीर तथा आरामपरस्त लोगों को हुआ करता था।
Dil ke Rog ke Lakshan, Kaaran, aur isse bachne ke upay
लेकिन अब तो यह हर किसी को अपनी चपेट में ले लेता है। जिसका डॉक्टरी इलाज़ बहुत महंगा है। परहेज करते हुए अपने रहन-सहन तथा खानपान में यदि परिवर्तन कर लें, तो इससे छुटकारा पाना कठिन भी नहीं। अगर आप सावधान रहते है तो आपको हृदय रोग होगा ही नहीं। इस Article में ( Dil ke Rog ke Lakshan, Kaaran, aur isse bachne ke upay ) हम इसी विषय पर बात करने वाले है कि कैसे हृदय को बीमारियों से बचाया जा सके। ताकि हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकें।

विषय सूची :-

  1. हृदय रोग के लक्षण क्या हैं - Symptoms of heart disease in Hindi. 
  2. हृदय तथा हृदयरोगी की जानकारी - Cardiovascular and heart disease information in Hindi. 
  3. हृदय रोग में ध्यान देने योग्य बातें - Things to note in heart disease in Hindi. 
  4. सीने में दर्द होना - Chest pain In Hindi.  
  5. स्वंय हृदय रोग को कैसे चेक करें - How to check my own heart disease in Hindi. 
  6. हृदयरोग की संभावनाएं - Chances of heart disease in Hindi
  7. क्या करें यदि हृदयरोग की संभावना लगे - What to do if there is a possibility of heart disease in Hindi.
  8. रोग का आभास होते ही अपनी जीवन शैली बदल डालें - Change your lifestyle as soon as you feel the disease in Hindi. 
  9. हृदय रोग का उपचार कैसे करें - Dil ke Rog ka Upchar kaise karein.


⇒ हृदय रोग के लक्षण क्या हैं ?

जब हृदय रोग हो जाता है या अपना असर दिखाने लगता है, तो निम्लिखित लक्षण सामने आते है। ये सभी लक्षण एक साथ भी हो सकते है। जैसे :-
  1. भोजन कर लेने के तुरंत बाद रोगी बेचैनी का अनुभव करने लगता है। 
  2. पीड़ित की छाती के बाएं भाग में दर्द का आभास होता है। 
  3. यदि रोगी थोड़ी सी मेहनत करके थकावट महसूस करने लगे, उसकी साँसे फूलने लगे, तो समझें हृदय रोग होने का लक्षण है। 
  4. कभी कभी टखनों में सूजन हो जाना भी इस रोग का संकेत है। 
  5. अक्सर सांस लेने में तकलीफ होना। 
  6. जैसे ही व्यक्ति कुर्सी या चारपाई से उठकर खड़ा होता है, तो उसे हल्का सा चक्कर महसूस होता है। 
  7. ऐसा महसूस होना जैसे कोई बाहरी चीज रोगी के हृदय पर दबाव डाल रही है। 
  8. चेहरे पर सूजन दिखाई देना। 
  9. खान-पान या किसी कार्य में मन न लगना। 
  10. हृदय के कार्य तथा ब्लड प्रेशर आपस में निकट का संबंध रखते है। यदि हाई ब्लड प्रेशर के रोगी को ऊपर बताया कोई भी लक्षण नजर आने लगे, तो उसे अधिक सावधान होना चाहिए। 
  11. नाड़ी (Pulse) की गति तेज़ होना तथा हृदय की तेज़ धड़कन इस रोग के होने का संकेत है।      

⇒ हृदय तथा हृदयरोगी की जानकारी 

  1. आम व्यक्ति का हृदय एक बंद मुट्ठी के समान होता है। 
  2. एक स्वस्थ व्यक्ति के दिल का भार 200 ग्राम के करीब होता है। 
  3. एक व्यक्ति का हृदय बड़ा ही पेचीदा होता है। इसका निर्माण असाधारण है। मीलों लंबी धमनियां (Arteries), कोशिकाएं (Cells), तथा शिराएं (Veins) हृदय में खून का प्रवाह ( आना जाना ) बनाए रखती है। 
  4. रक्त एक मिनट में 60 से 80 बार पंप करता है। सिकुड़ता और फैलता है इसी क्रिया से रक्त धमनियों आदि में भेजा जाता है। 
  5. एक शरीर, वैज्ञानिक के अनुसार, आज यदि एक व्यक्ति 70 वर्ष की आयु तक जीवित रह सकता है, तो उसके हृदय में रक्त लगभग 3 अरब बार पंप होता है। 
  6. आमतौर पर हृदय रोग चालीस वर्ष की आयु के बाद ही होता है, मगर बहुत ज्यादा गलत खानपान और रहन-सहन रोग को पहले भी आंमत्रित कर लेता है। 
  7. यह महिलाओं को कम होता है। 
  8. अमीर लोगों को उनकी आरामपरस्ती और अनियमित जीवन के कारण यह अधिक होता है। वैसे आजकल यह अमीर और गरीब दोनों को ही होता देखा गया है। इस रोग के मरीज़ों में पुरुषों की संख्या अधिक पाई जाती है। 
  9. इस रोग से होने वाली पीड़ा लगभग चार मिनट के आसपास रहती है। 
  10. जिस शरीर में खून की अधिक कमी हो, उसे यह रोग जल्दी हो सकता है। 
  11. जिस व्यक्तियों की धमनियों (Arteries) का Hole तंग (संकरा) हो जाता है, उसे हृदय की आवश्यकता के लिए रक्त पहुँचने में थोड़ी मुश्किल होती है। यदि उस व्यक्ति को थोड़ा काम करना पड़े, तो बढ़ी हुई रक्त की आवश्यकता में कठिनाई आती है। इसी से हृदय रोग हो जाता है। 
  12. कभी-कभी यह रोग मानसिक कारण से भी हो सकता है इससे घृणा, चिंता, भय, गुस्सा, उत्तेजना, तनाव आदि कारण मुख्य होते है। ऐसे में हृदय की छोटी नलियों में संकुचन (Contraction) हो जाती है। इस वक़्त हृदय में रक्त के संचालन (Operations) में दिक्कत ही यह रोग पैदा करती है। 
  13. कई बार हृदय रोग अनुवांशिक कारणों से भी हो जाता है। यदि व्यक्ति यह बात पहले से जानता हो, तो वह अत्याधिक सावधान रहकर इससे बच सकता है। इसमें ध्यान, साधना, योगासन, लम्बी सैर खान-पान में सावधानी आदि मददगार हो सकते है। 
  14. हृदय रोग भले ही किसी भी नाम से जाना-पहचाना जाए, सभी के मुख्यत: एक जैसे ही कारण होते है। इनमें :-
    • थोड़ी देर की हृदय पीड़ा, दिल का दौरा। 
    • ज्यादा देर की हृदय पीड़ा, हृदयघात। 
    •  हृदय का आकार छोटा या बड़ा पड़ जाना। 
    •  हृदय में सुराख (Hole, छिद्र) हो जाना। 
    • हृदय शोथ होना जिससे दिल पर सूजन आ जाना। 
    • हृदय कपाट (Cupboard) की तकलीफ। 
    •  रक्त नलिकाओं का कड़ा हो जाना। 
    •  हृदय की मांशपेशियों का फैलना। 
    •  दिल का जोर-जोर से धड़कना आदि अनेक संकेत है, मगर सबके कारण लगभग एक से है। 
  15. मोटे तौर पर किसी भी प्रकार के हृदय रोग में निम्नलिखित कुछ बातें एक-सी होती है। साधारण व्यक्ति के लिए इतनी जानकारी ही काफी है। इससे अधिक डॉक्टर की सलाह पर चलना ही बेहतर है, जिसमें कभी लापरवाही न करें -
    • ऐसे में हाई ब्लड-प्रेशर हो जाना आम बात है। 
    • यदि मधुमेह की शिकायत हों, तो भी हृदय रोग हो सकता है। 
    • हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से भी हृदय रोग हो  सकता है। 
    • हमारे खून में यूरिक एसिड इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि हम अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा का अधिक सेवन करने लगते है। और जब यूरिक एसिड बढ़ता है, तो यह हृदय रोगों को जन्म देता है। 
    • जो आरामपरस्ती (Rest) में जीते है तथा शारीरिक व्यायाम बिलकुल नहीं करते, उन्हें भी हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है। 
    • जो व्यक्ति तम्बाकू खाते है। धूम्रपान करते है। तम्बाकू से बनी तथा नशे वाली पान-मसाला की पुड़ियां खाते है, उन्हें भी यह रोग घेर सकता है। इसलिए हम आपको स्ट्रांगली रेकमेंड करते है कि धूम्रपान और एल्कोहल (शराब) के सेवन से बचें। 
    • यदि शरीर का भार आयु, ऊंचाई से अधिक बढेगा, तो तकलीफ होगी। मोटापा नुकसान देता। शरीर का भार नियंत्रण में हो, तो दिल से संबंधित रोग आपके दरवाजे पे दस्तक दे सकते है। 
    • ये सात कारण मुख्यत: हृदय रोगों के जन्मदाता है। यदि आप, इन्हे मानकर चलेगें तथा इन कारणों को जीवन में स्थान नहीं देंगें, तो आप हृदयरोग होने की संभावना को ही खत्म कर सकते है। यह बात अपने दिमाग में Store कर लें।    

⇒ ध्यान देने योग्य बातें 

जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक है, उन्हें ऊपर बताई गई 7 बातों के अतिरिक्त कुछ अन्य बातों की ओर भी ध्यान देना आवश्यक है। यदि वे ऐसा करते है, तो उन्हें हृदयरोग या इससे जुडी कोई भी बीमारी नहीं हो सकेगी :-
  1. जैसा की पहले हम चर्चा कर चुके हैं कि ज्यादा Rest नुकसान देती है। व्यायाम न करने से रोग लगता है। वहीं अगर हम हमारी क्षमता से ज्यादा काम करते है तो भी रोग पैदा होते है, सिमित परिश्रम ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। 
  2. स्त्रीगमन (Womanhood) अधिक करना, सम्भोग में लीन रहना, वीर्य (Semen) का विनाश, शारीरिक शक्ति का हास करना, हृदय रोगों के कारण बनते है। 
  3. जरूरत से ज्यादा ठंड में या जरूरत से ज्यादा गर्मी में रहना भी इस रोग का कारण हो सकता है। 
  4. यदि कोई महिला शारीरिक रूप से काफी कमज़ोर हो तथा उसे बार-बार गर्भधारण करना पड़े, तो उसे हृदय रोग हो जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
  5. शरीर में अधिक गठिया रोग होना, निमोनिया हो जाना अथवा सुजाक होना भी हृदयरोग के कारण बन सकते है। इन रोगों पर काबू बनाएं रखें, वरना ये कठिनाई पैदा कर सकते है। 
  6. टी.बी का रोग हो अथवा शरीर में खून की कमी हो, इनका उचित इलाज़ न करना भी हृदय रोगों की संभावना में इजाफा करता है। 
  7. शरीर में होने वाला कोई भी रक्त विकार (परेशानी) परेशान कर सकता है। प्लूरिसी के कारण भी हृदयरोग की कोई परेशानी हो सकती है। 
पहले बताए 7 कारण और और ये 7 कारण, कुल 14 कारण ऐसे है जो हृदय रोग का कारण बन सकते है। यह बहुत बड़ा रोग है और बहुत महंगा भी। इसे बाद में काबू में रखना कठिन काम होता है, अंत: यदि आप ये सावधानियां बरतें, तो यह भयंकर रोग होगा ही नहीं।

⇒ सीने में दर्द होना 

हर सीने का दर्द हृदय रोग नहीं होता। फिर भी सीने का दर्द होने पर चुप बैठकर खतरा मोल न लें। अपने चिकित्सक से अपना Checkup करवा लें। हो सकता है गैस होने से, वायु होने से, इसका अधिक दबाव होने से ही सीने में दर्द हो रहा हो। इसलिए जांच करवा लें। 

⇒ स्वंय कैसे चेक करें इस रोग को ?

अच्छे चिकित्सक अपने रोगियों को सही रास्ता दिखाने में रूचि लेते है और वे अपने रोगी परिवारों को निम्नलिखित घरेलू चेकअप की सलाह देते है। 
  • स्टूल पर तेजी से चढ़ना-उतरना, ऐसा दो दर्जन बार (24 बार) करना, इस रोग का सही चेक है। यदि इससे सांस अधिक फूलने लगे, तो समझ लीजिए हृदय रोग का कुछ हद तक आप पर असर हो चूका है। यदि आप इस व्यायाम को करने से पहले अपनी नाड़ी (Pulse) की धड़कन नोट कर लें तथा बाद में फिर से नोट करें। अंतर मामूली लगे तो आप पूरी तरह स्वस्थ है क्योंकि हर इंसान को कोई काम तेज़ी से करते वक़्त सांस फूलना एक आम सी बात है। परंतु इस कार्य को करने में अधिक सांस का फूलना या बहुत थक जाने जैसे परिणाम सामने आते है, तो आप हृदयरोग की चपेट में आ रहें हैं। और इस स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टर से सम्पर्क करें।  

⇒ हृदयरोग की संभावनाएं 

हृदय रोग की कुछ संभावनाएं निम्लिखित लक्षण देखकर भी जान ली जाती है :-
  1. नाड़ी की गति धीमी होना। 
  2. थोड़ी सी हरकत से ही मुंह का रंग लाल हो जाना। 
  3. शरीर का तापमान कम रहे, शरीर ठंडा-ठंडा रहे, तो भी सचेत होने की जरूरत है। 
  4. उत्तेजना में न आएं। यदि किसी भी प्रकार की उत्तेजना से छाती में दर्द का आभास हो, तो जरूर कहीं गड़बड़ समझें। यदि ऐसी बातें दिखें या भोजन के बाद असहज दिखें, तो समझें कि हृदयरोग है। इसे ही अल्पकालिक हृदय शूल (कुछ समय के लिए हृदय में दर्द होना) का नाम दिया जाता है। 
  5. यदि पसीना निकलने लगे, शरीर नीला होने लगे, चेहरे का रंग पीला पड़ने लगे, नाड़ी की धड़कन कम हो, भुखार रहे, दस्तों या उल्टियों का बार-बार होना, तो भी सचेत हो जाना जरूरी है। 
  6. मात्र छाती के बाएं हिस्से में दर्द होना ही हृदयरोग की निशानी नहीं है। ऊपर विस्तार से बताई अन्य बातों का भी जरूर ध्यान रखें। 

⇒ क्या करें यदि हृदयरोग की संभावना लगे ? 

यदि हृदयरोग की जरा सी भी संभावना लगे या यह पक्का हो जाए कि हृदयरोग हो गया है, तो निचे बताई कुछ बातों को तुरंत ध्यान में रखें और अपनाएं :-
  1. घबराहट से बचें। बेचैनी न आने दें। धीरज से काम लें। 
  2. रोगी अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखे। अफरा-तफरी न मचायें। ताकि रोगी का मानसिक संतुलन न बिगड़े। 
  3. रोगी की देखभाल करने वाले भी ऊपर बताई गई दोनों बातों का कठोरता से पालन करें, वरना वह अधिक विचलित हो जाएगा तथा हृदयरोग उस पर ओर हावी हो सकता है। 
  4. अभिभावक (पास वाले) उसके बटन खोलकर वस्त्र ढीलें कर दें, जिससे उसे आराम महसूस होने लगे। अफरा-तफरी का सा माहौल पैदा करके, उसकी परेशानी को ओर न बढ़ाएं। 
  5. रोगी को ऐसा महसूस न होने दें कि वह खतरे से गुजर रहा है, नहीं तो उसे अधिक घबराहट होगी और रोग गंभीर हो सकता है। 
  6. ऐसी अवस्था में तुरंत डॉक्टर को फ़ोन कर दें या रोगी को डॉक्टर के पास ले जाएं। 
  7. डॉक्टर के पास पहुंचने तक यदि रोगी दिल की धड़कन बंद होने की शिकायत करने लगें, तो भी घबराएं नहीं। रोगी की रीड की हड्डी पर गरम तथा ठंडे पानी की पट्टी से बारी-बारी सेंक दें।
  8. यदि रोगी की दिल की धड़कन बढ़ रही हो, तो ठंडी पट्टी निचोड़ कर, करने से लाभ होता है। धड़कन घटकर सामान्य हो जाती है। पहले रोगी की क्रिया को पूरी तरह समझ लें पहले।     

⇒ रोग का आभास होते ही अपनी जीवन शैली बदल डालें

यदि किसी व्यक्ति को रोग का आभास हो जाए, तो उसे अपने खानपान और रहन-सहन  में जितना जल्दी हो सके बदलाव कर देना चाहिए। तब ही रोग को जड़ से उखाड़ा जा सकता है। कम से कम इसे बढ़ने से तो रोका ही जा सकता है। साथ-ही-साथ डॉक्टर की बताई दवा तथा परहेज को भी Follow करें। अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक है।   
  1. किसी भी प्रकार का नशा न करें। 
  2. सूर्यास्त से पहले बिस्तर से उठा जाएं। शौच आदि से मुक़्त होकर सैर को निकल जाएं। यदि ठंड हो तो मोटे कपड़े पहनकर जाएं। खुले वातावरण में सैर करते समय लंबे, तेज़ कदम तथा लंबे सांस लेना इस रोग से मुक़्ति दिलाते है। 
  3. पार्क में जाकर हल्का व्यायाम-योगासन अवश्य करें। ये रोगों को पास ही नहीं आने देते। 
  4. अपने आहार में पूरी तरह परिवर्तन कर लें। वसा हृदयरोगी के लिए हानिकारक होती है। तेल, मक्खन, घी का कम से कम सेवन करें। 
  5. डीप फ्राई तथा फ्राई किए हुए खाद्य पदार्थ न खाएं। तले परांठे, कचौरी, टिक्की, समोसा, पकोड़ा आदि सभी हानिकारक है। 
  6. कचौड़ी, बालूशाही तथा भारी-तली मिठाइयां बिलकुल न खाएं, वरना हृदयरोग बढ़ेगा। 
  7. ऐसे व्यक्ति के भोजन से चाट-पकोड़ी जैसे तले पदार्थ पूरी तरह हटा दें। मुंह के स्वाद के पीछे मत भागें। 
  8. अधिक-से-अधिक हरी, ताजा सब्ज़ियां तथा सलाद खाएं। 
  9. ताजा, मौसमी फल खाना इस रोग के बचाव में बेहतर होता है। आंवला, नींबू, संतरा आदि भी लाभ पहुंचाते है।       
  10. चावल में रूचि मत रखें। गेहूं की मोटी रोटी बिना चोकर निकाले खाएं। अंकुरित गेहूं अन्य अनाज, दालें काफी लाभ देते है। खाने में इनकी मात्रा बढ़ाएं। 
  11. इसबगोल तथा इसका छिलका किसी न किसी रूप में नियमित लें।
  12. भोजन करते समय मन शांत रखें। जितना प्रसन्नचित रहकर भोजन करेगें, उतना ही लाभ होगा। खाने को खूब चबा-चबाकर खाएं। 
  13. किसी भी काम में जल्दी न करें। धीरे, संतुलित मन से हर काम में हाथ डालें। गुस्सा करना, फ़िक्र में डूबे रहना, अपने आपको टेंशन में रखना, हर बात को गहराई से तथा बार-बार सोचना ठीक नहीं है। कुछ भाग्य तथा ईश्वर की इच्छा पर भी छोड़ दें। जो होगा देखा जाएगा। भयभीत रहना या दूसरों को भयभीत करने का प्रयत्न करना, हृदयरोगी के लिए घातक होते है।    
  14. चिंता चिता समान होती है, यह पक्की बात है। ईश्वर जो भी करता है सदा अच्छा ही करता है। इसकी इच्छा के सामने झुकना तथा परिणाम को स्वीकार करने की आदत बना लें। 
  15. जो नहीं मिला, उसकी चिंता करके अपने आपको अभागा न समझें। जो मिला है, उससे खुश रहें। ईश्वर की कृपा के लिए कृतज्ञ हों। उसको बुरा-भला मत कहें। जो नहीं मिला, उसके पीछे चिंता करके अपनी उपलब्धियों पर पानी न फेरे। 
  16. प्राणायाम जैसे योगासन इस रोग में लाभ देते है। इनसे सहनशीलता में भी वृद्धि होती है। 
  17. प्रात: उठकर एक दो गिलास पानी धीर-धीरे प्रतिदिन पीना चाहिए। पानी को गट-गट करके कभी नहीं पीना चाहिए। एक दिन में करीब 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। 
  18. काम वासना की पूर्ति, पत्नी के साथ संभोग करना भी हृदय रोग में फायदा करता है। मगर यह पूरी तरह क्षमतानुसार हो, सिमित हो तथा कभी कभार हो। इस कार्य को पूरी तरह त्याग देना भी हृदय रोग में वृद्धि करता है। क्योंकि वीर्य का अधिक स्त्राव भी नुकसानदायक होता है, अंत: अपनी शारीरिक शक्ति को ध्यान में रखकर ही संभोग करें।   

⇒ हृदय रोग का उपचार कैसे करें

Dil ke Rog se Bachne ke liye ya isse Chhutkara paane ke liye ghrelu Upchar अपनाकर लाभ उठाएं। आइए, इन्ही पर विचार करते है :
  1. हृदयरोगी को आरामदायक बिस्तर पर लिटाकर गुलाब का इत्र (Scent) सुंघाएं। छाती पर भी धीरे-धीरे मलें। गुलाब का इत्र बहुत उपयोगी होता है। 
  2. गुलाब के ताजा फूल मिले, तो उसे सूंघने को दें। 
  3. एक माशा जवाखार (जौ के क्षार से बनाया जाने वाला नमक) की मात्रा को गुलाब के अर्क में चन्दन की तरह घिसें। घिसे अर्क को पतला करके रोगी को पिने को दें। यह तुरंत असर दिखाएगा। 
  4. लहसुन का प्रयोग भी हृदयरोग में काफी लाभकारी होता है। दूध उबालते समय उसमें लहसुन के दाने छीलकर डालें। खूब पकने पर लहसुन के दाने छानकर निकाल दें और दूध पिला दें। 
  5. एक मुनक्के की गुठली निकालें और गुठली के स्थान पर हींग का छोटा टुकड़ा फिट करें। इस मुनक्के को गरम पानी से निगल लें। 
  6. आप जानकर चकित होंगे कि हृदय के रोगी के लिए अरबी की सब्ज़ी बहुत उपयोगी होती है। रोगी को एक समय में एक छोटी कटोरी अरबी की सब्ज़ी खिलाएं। अगर आप चाहें तो दिन में तीन बार। कई दिनों तक खिला सकते है। 
  7. भोजन करने के तुरंत बाद शहद खाना अधिक उपयोगी होता है अत: खाने के बाद छोटे दो चमच शहद के प्रतिदिन लें। 
  8. हृदय रोगी प्रतिदिन एक सेब चबाकर खाएं या एक छोटा गिलास सेब का रस पिएं, तो भी उत्तम रहेगा। 
  9. हृदय-रोगी पानी में रात में भीगी हुई लहसुन की पांच कलियां (दाने) प्रात: चबाकर खाएं और उस पानी को भी पी लें। ऐसा कुछ दिन तक करने से रोगी रोग मुक़्त हो सकता है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटाता है। 
  10. प्याज का रस एक चम्मच, एक चम्मच शहद के साथ नियमित दें। इससे भी कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में कमी आती है तथा दिल मजबूत होता है। 
  11. एक चम्मच शहद में दो छोटे चम्मच आंवले का चूर्ण मिलाकर खाने से रोग नियंत्रित होता है। 
  12. अंगूरों का ताजा रस निकालकर एक कप रोगी को रोजाना पिलाएं। सप्ताह भर पिलाने से बहुत राहत मिलेगी। 
  13. थोड़े-थोड़े करके तीन-चार बार में 250 ग्राम अंगूर प्रतिदिन खिलाएँ। 
  14. हमारे भोजन में 30 प्रतिशत तक कोलेस्ट्रॉल होता है जो पीलापन लिए वसायुक्त पदार्थ है। ऊपर दिए गए उपचारों से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ने ने दें। साथ में भोजन में भी घी, मक्खन, तेल आदि को कम-से-कम लें। नशा न करें तथा मांस, अंडों का सेवन कम करें (Khaskar Dil ke Mareez). नियमित रूप से व्यायाम करें। इससे आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अवश्य काबू में रहेगी। 
  15. अंकुरित अनाज, आंवला, नींबू, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन का तेल, प्याज़, लहसुन आदि प्रयोग में लाने से भी कोलेस्ट्रॉल सीमा के अंदर रहता है और रोग से भी बचाव होता है। 

⇒ Conclusion:-

 इस लेख में हमने Dil ke Rog ke Lakshan, Kaaran, aur isse bachne ke upay आदि पर पूरी जानकारी देने का प्रयत्न किया है। इन तरीकों पर अमल करने से रोग की संभावना को कम किया जा सकता है तथा रोग को घटाया भी जा सकता है। फिर भी हम आपसे विनम्र निवेदन करते है कि आप अपने डॉक्टर के सम्पर्क में रहकर इस घातक रोग से बच सकते है। इसमें जितना अधिक परहेज करेंगें, उतना जल्दी आपको फायदा होगा। उम्मीद है अापको ये Article अच्छा लगा होगा। अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस Article को अपने Friends में भी शेयर करें। धन्यवाद। 

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