ये 14 बातें बहुत मायने रखती है अगर आप माँ बनने की Planning कर रही है तो।

मातृत्व ( माता का पद ) जहाँ एक ओर सुखद अनुभूति देता है वहीं इस काल में बेहद सावधानियां बरतने की की आवश्यकता होती है। क्योंकि इन दिनों में आपको अपने लिए नहीं, बल्कि अपने होने वाले शिशु के लिए भी जीना होता है। इस काल (दौरान) किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए  आइए, जानते है कि Pregnancy se pahle kin kin bato ko dhyan mein rakhna chahiye :-
 ये 14 बातें बहुत मायने रखती है अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही है तो
  1. युवतियों को कुछ रोग हो सकते है, जैसे कि टीबी, दमा, थायरॉयड, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी। इन लोगों को तो विशेष रूप से, और जिन्हे कोई रोग न हो, उन्हें भी गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। 
  2. स्त्री रोग विषेशज्ञों का कहना है कि ग़र्भाधारण से पहले Pre-conception कॉउंसलिंग जरूरी है, क्योंकि भ्रूण (Embryo) यानी गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों का विकास 15वें दिन से शुरू हो जाता है।  इस समय तक महिलाओं को मालुम नहीं होता कि वे गर्भवती है। जब मालुम पड़ता है, तब भी डॉक्टरी सलाह में देरी कर देती है। इस समय भ्रूण के शारीरिक विकास पर किसी भी तरह की बिमारी या दवाओं का असर पड़ सकता है। इस दौरान विशेष रूप से अंगों की बनावट भी प्रभावित होती है जिससे कि मस्तिष्क या रीड की हड्डी में खोट, हृदय की तकलीफें, चेहरे, नाक, कान व अन्य अंगो की बनावट में खोट हो सकती है। 
  3. गर्भ ठहरने का पता चलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। हर हॉस्पिटल में गर्भवस्था का ख्याल रखा जाता है। वहां अपने नाम का एक कार्ड बनवाएं तथा प्रत्येक 15 दिन के बाद डॉक्टर से Checkup करवाएं। 
  4. रक्तचाप :- Blood Pressure नियमित रूप से चेक करवाती रहें। 
  5. डॉक्टर के अनुसार दवा सेवन करें :- कोई भी X-Ray अथवा दवा मासिक-धर्म के दसवें दिन के बाद लें, बहुत जरूरी हो, तो डॉक्टर को बताएं कि आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही है। वे आपको उसके अनुरूप दवाएं देंगे, जिन्हें गर्भवस्था में लेना सुरक्षित रहेगा। 
  6. फॉलिक एसिड का सेवन :- नियमित रूप से फॉलिक एसिड की गोली लें। यह एक Vitamin है। जिसके सेवन से मस्तिष्क एवं रीड की हड्डी में खोट (खराबी) होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। खासकर वे महिलाएं, जो 30 वर्ष की आयु से अधिक है। जिन्हें मिर्गी अथवा डायबिटीज का रोग है या जिनके परिवार में ऐसे किसी बच्चे का जन्म हुआ है, उन्हें तो यह विटामिन अवश्य लेना चाहिए।   
  7. किसी भी रोग के लिए अगर लम्बे समय से दवा चल रही हो, तो डॉक्टर से मिलें। इन दवाओं को बदलने की या कम करने की जरूरत हो सकती है। 
  8. यदि पिछली प्रेगनेंसी में कोई तकलीफ हुई हो, जैसे कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, समय से पहले डिलीवरी, शिशु का अनुचित विकास या किसी अंग में खराबी, तो गर्भधारण से पहले डॉक्टर से सलाह लें, ताकि वह सब फिर से न हो। 
  9. अपने हीमोग्लोबिन की नियमित रूप से जांच कराएं। गर्भकाल में रक्ताल्पता (खून की कमी) न हो, इसका पूरा ध्यान रखें अन्यथा प्रसव के समय परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। 
  10. महीने की पहली तारीख को अपना वजन चेक करें। गर्भकाल में वजन बढ़ना आम बात है। बढे हुए वजन से उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, डायबिटीज आदि की आशंका रहती है। 
  11. सप्ताह में 2 बार अपने Urine की जांच कराएं। आमतौर पर पेशाब में Albumin प्रोटीन अनुपस्थित रहता है, मगर गर्भकाल में कोई उलझन (Complication) होने पर पेशाब में Albumin Protein आने लगता है। 
  12. पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जब अमाशय से निकलकर मुख तक पहुँचता है, तो मुंह खट्टे पानी से भर जाता है। इसे हार्ट बर्न कहते है। यह स्थिति गर्भकाल में बहुत अधिक होना सम्भव है। 
  13. कमर का दर्द आजकल जो आम परेशानी है और गर्भकाल में इसकी संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। ऐसा कई बार Calcium की कमी के कारण भी हो सकता है।  
  14. पैर की मांसपेशियों में अकड़न, ऐंठन भी गर्भावस्था में काफी हो जाती है। इसके लिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में कैल्शियम का सेवन करना चाहिए, माँसपेशियों की हलकी-हलकी मालिश करने पर भी काफी आराम मिलता है।   

⇒गर्भवस्था में देखभाल।  

  1. समय (सप्ताहों में) = जांच (अनिवार्य)
  2. शुरूआती दौर (जल्द से जल्द) = हीमोग्लोबिन, पेशाब की जांच, रक्त समूह एंटीबाडी की जांच, हेपेटाइटिस-B, वायरस स्क्रीनिंग। 
  3. 8-18 सप्ताह तक = अल्ट्रासॉउन्ड। 
  4. 16-18 सप्ताह तक = माता के सीरम एल्फा फिटो प्रोटीन। 
  5. 26-28 सप्ताह तक  =  मधुमेह से संबंधित स्क्रीनिंग, हीमोग्लोबिन की पुन: जांच, ब्लड ग्रुप एंटीबाडी टेस्ट पुन:।
  6. 28 सप्ताह तक =  एंटी - D इम्युनोग्लोबुलिन। 
  7. 32-36 सप्ताह तक =  अल्ट्रासॉउन्ड पुन: हीमोग्लोबिन की जांच, गुप्त रोगों की जांच।  
  ये 14 बातें बहुत मायने रखती है अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही है तो।

⇒ध्यान न देने पर होने वाली परेशानियां। 

  1. गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप सबसे बड़ी परेशानी है नियमित रूप से जांच करवाना ही बेहतरीन उपाय है उच्च रक्तचाप यदि लम्बे समय तक रहे, तो हृदयरोग, लकवा, आँखों की रौशनी जाना आदि परेशानियां हो सकती है। 
  2.  मूत्र में Albumin प्रोटीन का उपस्थित होना भी इस समय की बड़ी जटिलता है। इससे शरीर में सूजन तथा गुर्दों पर अकारण अनावश्यक दबाव पड़ता है। जिससे यहाँ की कार्यप्रणाली भी बाधित हो सकती है। 
  3. मिर्गी के दौरे भी गर्भवस्था की परेशानियों में शामिल है यदि ऐसा हो, तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। 


⇒मोटापा कम करें।   

  1. मोटापे की वजह से गर्भवस्था के दौरान काफी तकलीफें हो सकती है, जैसे कि Abortion (गर्भपात), ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, समय से पहले डिलीवरी, सीजेरियन की आशंका और बच्चे को जन्म के पश्चात Infection आदि। 
  2. बच्चे का वजन भी अधिक होने की स्थिति में प्रसव के दौरान तकलीफ हो सकती है। रिसर्च में पाया गया है कि जन्मजात समस्याएं होने की आशंका मोटी महिलाओं के बच्चों में अधिक पायी जाती है। गर्भवस्था के दौरान तो आप वजन घटाने के बारे में सोच भी नहीं सकती है, इसलिए पहले से ही ध्यान दें। 

⇒तनाव से दूर रहें।  

  1. सबसे जरूरी है कि सकारात्मक विचार रखें और खुश रहें। तनाव के दौरान बनने वाले हॉर्मोन्स आप एवं गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डाल सकते है। 
  2. पीरियड न आने पर हफ्ता भर रुकें, फिर प्रेगनेंसी टेस्ट करवाएं। यह परीक्षण आप घर पर भी कर सकती है Test Kit के जरिए यह किट आपको केमिस्ट से मिल जाएगी। और इस पर दिशा-निर्देश भी दिए होते है। टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें। 


⇒गर्भवस्था के खतरनाक लक्षण। 

यदि गर्भवस्था के दौरान निम्नलिखित लक्षणों का पता चले, तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें, क्योंकि इन्हें नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते है जैसे :-
  1. किसी प्रकार का योनि मार्ग से रक्तस्त्राव (Bleeding) होना।
  2. चेहरे या उँगलियों पर सूजन होना। 
  3. लगातार असहनीय सिरदर्द होना। 
  4. लगातार उलटियां होना। 
  5. कँपकपी के साथ बुखार आना। 
  6. पेट में दर्द होना। 
  7. आँखों की रौशनी में परिवर्तन। 

⇒गर्भवस्था के समय से जुडी कुछ भ्रांतियाँ। 

अक्सर इन दिनों महिला को निम्नलिखित शंकाएं घेरे रहती है। 
  1. सहवास (यौन संबंध) नहीं करना चाहिए :- ग़र्भकाल में सहवास को टालने का कोई प्रतिबंध नही है। पर हाँ, अंतिम 3 महीनों में इसे टालना ही बेहतर है, अन्यथा शिशु को हानि हो सकती है या फिर ब्लीडिंग अधिक हो सकती है। 
  2. व्यायाम हरगिज न करें :- यह भी एक अफवा या भ्रान्ति ही है। यदि आप नियमित जांच करवा रही है तथा गर्भकाल सामान्य दौर से गुजर रहा है, तो हल्के व्यायाम करने में कोई खतरा नहीं है। जैसे :- पैदल चलना, योग करना, तैराकी आदि। हाँ, प्रसव की तारीख के नजदीकी दिनों में भरपूर आराम करें। 
  3. खूब खाना चाहिए :- ग़र्भकाल का अर्थ है दो के लिए खाना यानी एक स्वंय और दूसरा गर्भस्थ शिशु के लिए। पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप जरूरत से ज्यादा खाएं। इसका मतलब यह है कि आपका आहार संतुलित होना चाहिए। 

 #  Conclusion :-


हम उम्मीद करते है कि आप इस लेख को पढ़कर काफी कुछ सीख पाए होंगें। कि Pregnancy se Pahle kaunsi Baatein Dhyan Mein Rakhein. और गर्भवस्था में कुछ बातें हमेशा याद रखें जैसे :-
  1. खुद की सफाई पर विशेष ध्यान दें। 
  2. पौष्टिक आहार का सेवन करें। 
  3. ज्यादा काम करने से बचें। 
  4. रोजाना 10 से 15 मिनट पैदल वॉक करें। 
  5. सहवास जारी रखें इससे प्रसव के समय महिला की पीड़ा थोड़ी कम हो जाती है। परंतु आखिरी के 3 महीनों में सहवास (शारीरिक संबंध बनाना) से परहेज करें। 
  6. बिल्लियों से दूर रहें।  
अंत: अब आपको ज्ञात हो चूका होगा कि गर्भवस्था से पहले किन-किन बातों को जानना जरूरी है। ताकि गर्भकाल में हम वो गलतियां न करें जो जाने-अनजाने में दूसरी महिलाएं कर बैठती है। 

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