T.B ⇨ टी.बी रोग अब आप पर हावी नहीं होगा - T.B ke karan, lakshan aur upay in Hindi.

T.B kya Hai → तपेदिक के अलावा क्षय रोग, यक्ष्मा, काक यक्ष्मा और ट्यूबरक्लोसिस (टी.बी) के नाम से भी जाने जानेवाली यह संक्रामक बीमारी शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोगों में लगभग समान अनुपात में ही लोगों को अपना शिकार बनाती है। इस बिमारी का मुख्य कारण गरीबी ही है। गरीबी के कारण लोग पर्याप्त और संतुलित आहार नहीं ले पाते हैं, अँधेरे और छोटे से घरों में अपना जीवन व्यतीत करते है और हद से ज्यादा शारीरिक श्रम (Work) करते है इसके चलते वे इस श्रम से मिलने वाले वेतन से  अपने परिवार का गुजारा बहुत मुश्किल से कर पाते है। और फिर पर्याप्त और संतुलित भोजन की तो बात ही दूर है। 
 T.B ke karan, lakshan aur upay
यह रोग बहुत जल्द एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसके फैलने का मुख्य कारण अज्ञानता (किसी चीज के बारे में Proper जानकारी न होना) है। इस बिमारी के रोगी भी सामान्य लोगों की तरह इधर-उधर थूकते है, स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं देते और लापरवाही बरतते है। जिसके कारण वे खुद के साथ-साथ अन्य लोगों को भी खतरे में डालते है। और उन्हें संक्रमित कर देते है। T.B के रोगी के थूक में टी.बी के जीवाणु 'ट्यूबरक्लोसिस बैसिलस' होते हैं। जो खांसने के समय लाखों की संख्या में बाहर आकर हवा में बिखर जाते है। अगर टी.बी के रोगी के खांसते समय थूक की फुहार (थूक कुछ बूंदें) दूसरे किसी व्यक्ति के शरीर में चली जाए तो उसे भी टी.बी होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

हालांकि इसके जीवाणु सूखी और प्रदूषित धूल-मिटटी के साथ भी सांस के जरिए फेफड़ों में जा सकते है। तपेदिक (T.B) से पीड़ित व्यक्ति को किसी को भी चूमना या किसी भी व्यक्ति के मुंह के पास खांसने से सख्त परहेज करना चाहिए। अगर माता या पिता दोनों में से भी कोई इस बीमारी से पीड़ित है तो अपने बच्चों को न चूमें। ऐसा करने से आप उन्हें भी संक्रमित (infected) कर देंगें ! रोगी की व्यक्तिगत वस्तुएं भी उसके थूक से संक्रमित हो सकती है और अन्य लोगों द्वारा अगर उन वस्तुओं का उपयोग किया जाए तो उन्हें भी यह संक्रमित अन्यथा कहने का आशय है कि उन्हें भी टी.बी हो सकती है।

आमतौर पर तपेदिक के जीवाणु बचपन में ही शरीर पर आक्रमण करते है। इससे होने वाली प्रक्रिया को प्राथमिक संक्रमण कहते है। चूँकि इसके जीवाणु सांस के जरिए ही अंदर जाते है। इसलिए यह सबसे पहले फेफड़ों को अपना शिकार बनाते है। इसका पता 'ट्यूबरक्यूलिन' जांच से चलता है। हालांकि शुरूआत में इसके लक्षणो का पता नहीं चलता। यह चुपचाप होने वाली प्रक्रिया है। लेकिन ये टी.बी के जीवाणु शरीर में कई वर्षों तक जीवित रह सकते है। जब किसी कारणवश शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तब ये जीवाणु शरीर पर अपना Attack करते है। इसे प्रौढ़ (Mature) प्रकार का रोग कहते है।

जिन लोगों में संक्रमण छोटी उम्र में ही हो जाता है, उनमें प्राथमिक (Primary) तपेदिक कई प्रकार के घातक रोग पैदा कर देता है। उदारहरण के तौर पर, ये रोगाणु खून के जरिए दिमाग में प्रवेश करके Tuberculic Meningitis पैदा कर सकते है। इसके अलावा रोगाणुओं के हड्डियों में जाने पर हड्डी की टी.बी (Bone T.B), गुर्दें में जाने पर (Kidney T.B) उदर (पेट) में जाने पर पेट की तपेदिक (Abdominal T.B) और फुफ्फुस (Lungs) में जाने पर फुफ्फसीय तपेदिक (फेफड़ों की टी.बी) पैदा होती है।

फेफड़ों की टी.बी से लोग अधिक संक्रमित होते है। यह फेफड़ों के उपर वाले भाग को संक्रमित (infected) करती है। यह अक्सर बचपन में हुए प्राथमिक तपेदिक के कारण ही प्रौढ़ावस्था (Maturity) में प्रकट होती है। जब अपर्याप्त भोजन और दूसरी बीमारियों के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तब टी.बी के जीवाणु व्यक्ति के फेफड़ों पर आक्रमण कर देते है। .इस रोग का आरंभ ग्रथियों के समूह (Tubercular lymphadenitis) के रूप में होता है, जो बाद में फेफड़ों को भी अपना शिकार बना लेता है। समय पर इसका इलाज़ नहीं कराने पर कैविटी बन जाती है। इसके बाद फाइब्रस हो जाने पर यह रोग Chronic (पुराना) हो जाता है और रोगी को इससे जल्दी मुक़्ति नहीं मिलती।

⇒ टी.बी कितने प्रकार की होती है - T.B kitne parkar ki hoti hai.

T.B दो प्रकार की होती है Latent T.B और Active T.B

  1. Latent T.B ⇨ इस स्थिति में, आपको टीबी का संक्रमण होता है, लेकिन बैक्टीरिया आपके शरीर में एक निष्क्रिय ( inactive) स्थिति में रहता है और कोई लक्षण नहीं होता है। Latent T.B, जिसे निष्क्रिय टीबी या टीबी संक्रमण भी कहा जाता है, संक्रामक (Contagious) नहीं है। यह सक्रिय टीबी में बदल सकता है, इसलिए गुप्त टीबी (टी.बी का पता न होने पर) वाले व्यक्ति के लिए उपचार महत्वपूर्ण है और टीबी के फैलाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। अनुमानित लगभग 2 अरब लोगों को गुप्त टीबी है।
  2. Active T.B  इस स्थिति में टी.बी के बैक्टीरिया सक्रिय होते है और ये आपको बीमार बनाते है और दूसरों के लिए फैल सकती है। यह टीबी बैक्टीरिया के संक्रमण के पहले कुछ हफ्तों में हो सकता है, या यह कई सालों बाद हो सकता है।

⇒ T.B (टी.बी) के लक्षण क्या है - T.B ke lakshan kya hai.   

किसी व्यक्ति के तपेदिक (T.B) के जीवाणु से संक्रमित होने पर आम तौर पर कई महीनों तक व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन बाद में :-
  • थकान 
  • बुखार
  • ठंड लगना 
  • भूख में कमी 
  • अचानक  वजन कम होना। 
  • रात को पसीना आना 
  • बलगम वाली खांसी 
  • थूक में खून आना
  • सीने में दर्द होना 
  • सांस लेने में दिक्कत होना  
  • शाम के समय हल्का-हल्का बुखार रहना आदि 
ऐसे तपेदिक के लक्षण दिखाई देने लगते है लेकिन आर्थिक रूप से कमज़ोर रोगी अक्सर थूक में खून आने, साँस फूलने और सांस न ले पाने की स्थिति में ही अस्पताल में आते है। ऐसे में अगर इनका इलाज़ तुरंत शुरू न  किया जाए तो इनकी जान जाने का खतरा हो जाता है।

⇒ टी.बी की जांच - T.B ka Test.


तपेदिक यानी टी.बी के लक्षण प्रकट होते ही रोगी को छाती का एक्स-रे और थूक की जांच करवा लेनी चाहिए। तीन-चार दिन तक लगातार थूक की जाँच कराने पर टी.बी होने पर थूक में ट्यूबरकुलीन टेस्ट भी Positive आता है। तो तपेदिक की पुष्टि पूरी तरह से हो जाती है। खून और मूत्र से भी टी.बी का पता लगाया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति के थूक में खून न आ रहा हो, लेकिन उसकी खांसी दो सप्ताह में भी ठीक न हो तो भी छाती का एक्स-रे अवश्य करवा लेना चाहिए। तपेदिक होने पर छाती के एक्स-रे में फेफड़ों में धब्बे दिखाई देने लगते है। और थूक में तपेदिक यानी टी.बी के जीवाणु मिलते है।

⇒ टी.बी (T.B) का उपचार - T.B ka Upchar kya hai.

कुछ साल पहले तक टी.बी का इलाज़ बहुत कठिन था, लेकिन अब तपेदिक की नई-नई दवाइयों का इज़ाद होने से इसका इलाज़ सरल हो गया है। यही नहीं, पहले रोगी को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता था, लेकिन अब इसका इलाज़ घर पर भी किया जा सकता है। नई-नई दवाओं के आ जाने से इलाज़ कम समय में ही हो जाता है। आजकल तपेदिक के रोगियों को आमतौर पर आइसोनाइजिङ, रिम्फेसीन, पाइयरोजिनेमाइड, इथमबुटोल और इंजेक्शन स्ट्रेप्टोमाइसिन जैसी दवाइयां दी जाती है। शुरूआती इलाज में अक्सर इनमें तीन-या-चार दवाइयों का मिश्रण दो-तीन महीने के लिए दिया जाता है। 

उसके बाद छह से अट्ठारह महीने तक दो या तीन दवाइयों का मिश्रण दिया जाता है। इसकी खुराक अलग-अलग अंगों की टी.बी पर निर्भर करती है। चूँकि अधिकतर दवाइयां मुंह से ही ली जाती है, इसलिए रोगी का उपचार घर पर ही हो सकता है। रोगी को सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर सुबह खाली पेट दवा लेनी होती है। इलाज़ के आरंभ में आराम  करना भी जरूरी है। 

रोगी की चिकित्सा आम तौर पर डेढ़ से तीन महीने तक ली जानी चाहिए। उसके बाद रोगी सामान्य रूप से काम करने योग्य हो जाता है। सामान्य रोगियों को विशेष आहार लेने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन कमज़ोर रोगियों को पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी होता है। उन्हें अपने भोजन में दूध, अण्डे, कॉड लीवर तेल, विटामिन 'A' और विटामिन 'D' तथा कैल्शियम भी अधिक मात्रा में लेना चाहिए।

  1. कैल्शियम की कमी, कारण, लक्षण और उपचार।
  2. विटामिन-सी की कमी के कारण, लक्षण और उपचार।
  3. विटामिन-डी की कमी के कारण, लक्षण और उपचार।

रोगी को प्रकाश वाले कमरे में रखना जरुरी है और खांसी को रोकने के लिए कफ सिरप का प्रयोग करते रहना चाहिए। रोगी के लक्षणों पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है कि लक्षण कम हो रहे है या नहीं। गंभीर किस्म के रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।

⇒ टी.बी से बचाव कैसे करें - T.B se bchav kaise kare.      

टी.बी रोग से बचने का सबसे अच्छा उपाय बचपन में ही हर शिशु को B.C.G का टीका (Injection) लगवाना है। जिन वयस्कों में ट्यूबरकुलीन टेस्ट नेगेटिव हो, उन्हें भी B.C.G का टीका लगवाना चाहिए, क्योंकि इससे उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और फिर इससे तपेदिक के कीटाणु शरीर में प्रवेश करने पर टी.बी नहीं होती। तपेदिक (T.B) से बचने के लिए अच्छा पोषण, हवादार और प्रकाश वाले घरों में निवास, बी.सी.जी का टीका लगवाना तथा अपने स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच करवाना आवश्यक है।

⇒ Conclusion :-

( Ti.bi kya hai iske kaaran, lakshan aur upchar kya hai ) तो मेरे प्यारे दोस्तों अब आप जान ही चुके होंगे की तपेदिक यानी टी.बी किस हद तक इंसान को रोगी बना सकती है। जिसको ना कोई पसंद करता और ना ही कोई टी.बी के रोगी के पास बैठता है। परंतु ये सब स्वाभिक है जीवन में सुख दुःख तो आते ही रहने है। सुख स्वस्थ जीवन को बयां करते है और दुःख अस्वस्थ जीवन को। कल क्या होगा ये हमें नहीं पता। 



लेकिन अगर हम आज और अब से ही अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करने लगें, तो अवश्य हम एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते है। और टी.बी या कैंसर जैसी घातक बीमारियों से भी बच सकते है। हमें लगता है कि इस Article में हमने तपेदिक (T.B) से संबंधित मुक़्क़मल जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की है। अत: अगर आपको ये Article अच्छा लगा हो तो अपने विचार Comment box में शेयर करना न भूलें। और अपने चाहने वालों को भी ये जानकारी शेयर करें ताकि उन्हें भी इस जानकारी से अवगत कराया जा सके।  

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